गाँव की वो डोली 

वो छतों की डोलियाँ जिन्हें फलंगते थे कभी पतंग लूटने को .. वो गलियाँ आज सूनी पड़ी हैं , बस बची हैं वो बारियाँ वो दरवाज़े , वो लोह लक्कड़ .. सब घरों में दुबकें हैं TV कम्प्यूटर , whatsap , खेल भी indoors खेलने वाले भी IN doors.. 

वो कटुक नीम की निम्बोरी , वो मंझों में उलझे तार , वो सयलिकों की घंटियाँ लगती आपस में होड़ , वो भगवाँ झंडा मंदिर की प्रभात फेरी , वो झाँझ की आवाज़ , वो कूकती कोयल और वो बोलते मोर , और सबके हम बीच फलाँगते डोलियाँ .. आज सब यादें हैं और हैं बस सन्नाटा .. 

ज़िंदगी बीत गयी 

ज्ञान की अज्ञानता में ,

ज़िंदगी बीत गई ,

ज्ञ और आन के बीच ज़िंदगी,

पहचान बनाने में बीत गयी ..

अस्तित्व की खोज में ,

ज़िंदगी बीत गयी ,

अस्ती और त्व  के बीच ज़िंदगी ,

अहम पहचानने में बीत गयी.. “निवेदिता ”

P.S. अर्थ : 

ज्ञ – ज्ञात 

आन – शान 

अस्ती – मेरा 

त्व – तुम्हारा 

अहम – मैं , और अहंकार 

ज्ञान 

ज्ञान की परिभाषा क्या है ? क्या मात्र डिग्री होना या पढ़ा लिखा होना है ? क्यूँकि ज्ञान तो सभी के पास है , ज़िंदगी जीने जितना ज्ञान तो प्रभु ने पशु को भी दिया है । 

 किसी भी व्यक्ति के ज्ञानी होने की पहचान मात्र उसके ज्ञान उपार्जन से नहीं लगाया जा सकता , देखना यह चाहिए कि वह व्यक्ति अपने ज्ञान को जन हित में या समाज हित में किस प्रकार उपयोग में ला रहा है । 

ज्ञान और ज्ञानी को लेकर उठे मेरे मन की जिज्ञासा मेरे गुरुजी ने कुछ यही कहकर शांत की, परंतु अभी भी मेरे मन में जो शंका है वह यह कि जन हित और समाज हित का मापदंड क्या है ?

क्या किसी व्यक्ति मात्र के असंतुष्टि से हम यह अनुमान लगा लें कि सामने वाला व्यक्ति ज्ञान बाँटने में असफल है या हज़ारों की संतुष्टि उसकी सफलता है ? “निवेदिता”

भगवान के बल पर सभी मूल भूत , जड़ चेतन सभी प्रकाशित है , अलौकिक है 

Don’t read Shreemad Bhagwatji  as novel .
!Satyam pAram dhimahi !
Truth is adi and anant 
Shrey aur prey dauno chahiye .. sansar humein accha lag sakta hai parantu bhagwat prapti nahin 
“Vishvatutpatti hetave ”
Prabhu se chahna hai ki humare dukhon ko door karein ais 
Tapatray vinashaya

Falling Grace

Book Review ..

A book written by the Author Kunwar Nitin 


Description by Author 


A book with beautiful name and a good message.

A story of a woman who fall in love with a stranger at a place where only Lust can be found. 

The Hero in search of entertainment reaches a hub of call girls and there he find his love and make the woman feel beautiful and bring her dead emotions and trust back through his love ❤️. Those ladies starts believing Krishna in him and the author portrays his love with Krishna and Gopis love. 

He takes the lady to eternity, which brings her back to life and she opens up to the stranger with the story of disgrace she was living like a curse.

The book is full of Emotions , drama, erotica, love and incest at one time makes a lady feel beautiful.
My review:

 Description of the feelings of the lady after being raped is well described. 

In my view there are certain points which doesn’t sound real it gives a feel of pure fiction and Desi masala –  

A mother after being raped by her own Son broken and turns Out to be “Kali “to teach him and his friends a lesson, she changes their sex only when they are slept and toxicated . This sounds a little dramatical because not in real it is so easy . 

The moto of the Author visiting Kolkata is not well described. If the author just visiting the pubs and Bars just for fun and from the prostitutes , he comes straight back to his destination brings him in the custody no less then a flirt,  and a brat who is a play boy who is visiting such places just for fun and women . 

He portraits himself as Krishna, but in real Krishna is no play boy. The foreplay is being compared as Ras leela which might be controversial , though it’s my personal view. 

* I would suggest children under the age of nineteen should not read this book , as the content is for Adults only . 

A wonderful message is conveyed through the book “Rapists shouldn’t be allowed to board any where”.

This book is paisa wasool book , one time read full of different emotions . “Nivedita”

परछाईं

परछाईं है तूँ , और मैं ..
उड़ती तितली ,
तुझे पकड़ने की चाह में ,

बैठती ,सूँघती उड़े जा रही हूँ ..
तेरे साये से बंधी मेरी ज़िंदगी की डोर , 

तुझसे ही रातें तुझसे ही भोर .. 
कह तो दिया हर बार 

दिल से , नज़रों से , कलम से, 

फिर भी ना समझे तू ,

कहते हो चाहो तो कहदो ,

चाहती हूँ !! 

चाहती हूँ ! कहे जा रही हूँ ,

विरह वेदना सहे जा रही हूँ ,

ऐसी दुविधा है , 

न कहे बनता है , 

न रहे .. 

बस प्रेम की तड़प को सहे जा रही हूँ 

जो कह दूँगी तो तू समझेगा नहीं 

नहीं यह दुनिया समझने ही देगी 

ज़िंदगी के पशोपेश में फँसी 

घुट घुट कर जिए जा रही हूँ .. “निवेदिता”

कहानी

एक कहानी “निवेदिता” की ज़ुबानी ..

सुनलो, यह कहानी सूनलो,

कुछ मेरी कुछ तुम्हारी सूनलो,

मिलकर लिखी अब हमारी सूनलो,

कुछ खट्टी – कुछ मीठी 

कुछ कड़वे नीम की निम्बोरी सी, सूनलो 

सूनलो, यह अपनी कहानी सूनलो ।।
चंचल हवाओं सी, बरसती फुहारों सी, 

हँसती मुस्कुराती ठंडी बायरों सी ,

कुछ कही कुछ अनकही ,

कुछ विरह में बरसती बिरखा सी सूनलो 

लहरों में बहती कहानी , सूनलो 

सूनलो यह प्रीत भारी कहानी सूनलो ।।
पुखरी में पद्मसी, छांव भरे कदंब सी 

नख़रीली नार सी, सधृढ विचार सी, 

तेरी हँसती झलक बनती मेरा संसार सी,

कुछ नयी-कुछ पुरानी ,

कुछ परियों की इंद्रधानुशी कहानी सूनलो,

सूनलो, यह हमारी प्रेम कहानी सूनलो ।।
पल -पल चलती घड़ी की सुई सी ,

बाती की लो को जलाती रुई सी ,

सलौने कृष्ण पे सजती पीताम्बरी सी ,

कुछ बनती – कुछ सँवरती ,

कुछ इंतज़ार में बीतती कहानी ही सूनलो ,

सूनलो, ” निवेदिता” की ज़ुबानी सूनलो , 

यह प्रीत भारी कहानी सूनलो ।। “निवेदिता” 

Acid Burns 

I was forced to die ,

But my spirit kept me alive,

rising from the ashes,

Slowly and gradually ,

I will start living again,

the pain of being burned ,

Will heal with time, 

But whenever I will see ,

My reflection in the mirror,

I will be horrified,

Again will feel the same ,

Agony if burns will rise,

Rage will rise,

The blood in my veins,

Will boil like the heat of Sun,

The wounds they gave ,

Will get healed ,

But the scars will remain,

Throughout my Life , 

I will never be the same again .. Nivedita 

P.S. : I hope that such henious act will come to a complete end soon.

तेज़ाब 

कल प्रेम में मीरा ने ज़हर पी लिया ,

पर मैं असमर्थ कड़वी सच्चाई पीने में ,


मुस्कुराने से डरती हूँ , डर छुपाकर सीने में ;


डर कर पानी भी आज फूंकर पिया ,


कहीं तेज़ाब ना मिला हो पीने में ;


ताज कभी मुमताज़ की यादों मैं बना था ,


वो शांत सफ़ेद संगमरमर का खड़ा,


गवाह ,महोब्बत के मरकर भी जीने में ;


आज महोब्बत में संग मर-मर कर जीते हैं,


डाले तेज़ाब मुहब्बत के नाम का सीने में ;


प्रेम हीर रांझा सा पाक था अब तो बदनाम,


दहशत है आराम से घर पर सोने में;


वो मन चले जो उन्हें बे आबरू कर झुलसा गये ,


ढूँढ लाओ उन्हें ,आज छुपे हैं जाने किन कोनो में ;


कुंठित है मन मेरा , तन तो लूट ही गया ,


पर निवेदन है हर निवेदिता का मत दो पनाह ,


मत पिलाओ दूध ऐसै आस्तीन के सापों को ,


वरना ,कल तुम्हारी बेटियों की बोटियाँ भी ,


मिलादि जाएँगी उन तेज़ाब की बोतलों में । “निवेदिता”

Gift of Life



In you life has gifted me ; 

Someone so lovely and lively ,

Exploring thoughts rolling like dice 

delving deep into true meaning of life ,

My way of life had hardly any frills ;

with you my dear its no end to thrills, 

It was just so monotonous and lame,

Now Its’ beautiful, wishes to exchange ;

It is like Homophone of symphony ,

Nectar of Spirituality collected as honey;

solitude in life ,when there is enough time

Two watery eyes ,are the glasses of wine;🍷 🍷 

introspecting my mind and calming me down 

peace albeit, melancholy, sorrows and frown

You are the Lily standing amidst ,

Raising the grace In the Garden ,

words are short, feelings broaden;

New dimensions , new energy ,

Refined thoughts and new synergy ; 

you brought as Gift of life ,stay to be ..

Guarding my path , you are dear to me..  “Nivedita”