भोर

शोर मचा क्या भोर हुआ
देखो रोशन चहुं ओर हुआ
करके चंद्रिका का हरण
वो  चाँद कहीं ओझल हुआ ।।

कौन था वो जो आया था
मुझे नींद से जगाया था
मेरे जीने का रुख मोड़ गया
सुनहरे स्वप्न दिखाने आया था  ।।

निःस्वार्थ कभी शब्दों से कभी रँगों से
मोह गया मोहक मोहनी  हँसी से
हवा के झोंके सा जीवन मे आया
क्षण भर में बीत गया अपनी ही गति से।। ज्योत्स्ना “निवेदिता”

इस साल देखा

साल दर साल से  यह सिलसिला चलता जा रहा है
हर साल की तरह एक साल जाता है नया आता है
यही कोई छः महीने गर्मी के और कुछ छः सर्दी के
पर कुछ भी कहो इस साल सा न कभी साल देखा..

पिछले साल में हमने हर साल से अधिक साल देखा..
बन्द चार दिवारी में जब देखने को और कुछ न था
तो अपने और अपनों के मुखौटों के पीछे छिपा
वो दोगला चेहरा जो कभी न दिखा वह भी इस साल देखा..

फ़र्क़ सिर्फ इतना सा है कि इस बार यह साल अपने साथ
महामारी लेकर आया था और नया साल उसका इलाज
बचपन से देखा है पुराने साल के खत्म होने का जश्न
पर नये साल के आने की खुशी तो बस इस साल देखा..

प्रकृति ने भी खूब रोष दिखाया कभी भूकम्प कभी तूफान
जंगलो में होता अग्नि का पसार तो समुद्र में उबलता उफान
कहीं बाढ़ कहीं स्खलन लेकिन फिर बदलती करवट में प्रदूषण कमना और गंगा में डॉल्फिन भी इस साल देखा..
ज्योत्सना “निवेदिता”

नव वर्धभिनंदन

बीते 5 साल

ये पांच साल पलक झपकते ही निकल गए .. मानो कल की ही बात हो मैं ऑफ़स में थी और छोटी का फ़ोन आया बोली ब्लॉग क्यों शुरू नहीं करती और लिखती क्यों नहीं? मैंने उसे बोला लिखूंगी.. और फ़ोन रख दिया

To be contd..

Happy Anniversary WordPress and me

गुजराती बोल 🙏

दीपावली पर्व को हम प्रतिवर्ष अत्यंत धूमधाम से मनाते आए हैं परंतु इस कोरोना काल में क्या हम हमेशा की तरह उसी हर्षोल्लास से सुचारू रूप से इसे मना पाएंगे?
इस साल  महामारी के कारण दो गज की दूरी रखना और मास्क पहनना आवश्यक है, ऐसे में लोगों से मिलना मिलाना भाईचारा बढ़ाना खरीदारी करना इन सभी बातों पे इस महामारी का असर पड़ेगा, परंतु हमें यह याद रखना चाहिए कि जिस प्रकार प्रभु श्री राम कठिन से कठिन समय में भी अपना संयम रखते हुए वनवास के नियमों का पालन करते रहे उसी प्रकार हम भी उन्हीं के दिखाए  मार्ग का अनुसरण करते हुए यथाशक्ति इस पर्व को मनाएं।
  इस साल ध्यान रखने योग्य बातें यह है कि हम लोग जो आर्थिक तौर पर सशक्त है और त्योहार को धूम धाम से मनाने में सक्षम हैं उन्हें अपने से कम समर्थ लोगों की सहायता  करते हुए उनकी आवश्यकता का ध्यान रखना है। ऐसे बहुत से लोग होंगे जिनके घरों में रात का चूल्हा भी नहीं जलता होगा तो उन लोगों के लिए आप जो बन पड़े वह करें और उनकी आंखों में खुशी का दीप जलाएं
जैसे कि हमारे प्रधानमंत्री जी ने “वोकल फ़ॉर  लोकल” का आवाहन किया है हमें उनके बताए इस मार्ग पर चलते हुए अपना योगदान अधिक से अधिक देने  का प्रयास करते हुए  सिर में इस्तेमाल की जाने वाली कंघी से लेकर पैरों में  पहने जाने वाली चप्पल तक जहां तक हो सके स्वदेशी ब्रांड  ही खरीदना है  इससे हमारे स्वदेशी ब्रांड भी ग्लोबल ब्रांड बन पाएंगे।
इस दीपावली देश के लिए देश वासियों के लिए और अपने अपनों के हित के लिए सभी नियमों की अनुपालना करते हुए प्रभु श्री राम के अयोध्या नगरी अपने जन्म स्थल श्री राम जन्मभूमि में लौटने की ख़ुशी सभी के साथ मिलकर मनानी है। जय श्री राम “निवेदिता”

मंथन अच्छी बातों का

काका श्री से कल फिर से भेंट हुई बातों बातों में बात छिड़ती चली गई, उन्होंने एक बात कही जो मेरे मन को भा गई तो मेरे मुँह से सहसा निकल पड़ा यह अच्छी बात कही काका..

काका कहने लगे !! अच्छी बातों की यही खासियत होती है कि जब भी पढ़ो, सुनो या देखो अच्छी लगती हैं । पर ये केवल कहने या लिखने की बातें नहीं होती हमें इन्हें अपने आचरण में लेना चाहिए अच्छी बातें दवाईयों की भांति होती है जब तक हम इन्हें स्वयं पर इस्तेमाल नहीं करोगे तब तक यह हमें फायदा नहीं देंगी इस लिए यदि हम चाहते हैं कि अच्छी बातें हमें फायदा पहुंचाने का काम करें तो हमें इन्हें अपने जीवन में उतारने की जरूरत है अर्थात स्वयं ग्रहण करने की आवश्यकता है कहते हैं यदि हम‌ दुसरो का भला करेंगे तो हमारा भी भला ही होगा नहीं विश्वास तो करके देखों किया ऊनका इतिहास देखों ।

हमें अपने आज पर ध्यान देना चाहिए और भविष्य की ज्यादा चिंता नहीं करनी चाहिए हमें तो बस सत्कर्म करते रहना है बाकी सब सम्हालने के लिए तो भगवान हैं।

देखिये संतों ने बहुत अच्छी बात कही है: “इस संसार की गतिविधियों पर नहीं अधिकार किसी का है जिसको हम परमात्मा कहते ये सब खेल उसी का है” इस लिए हमें अपना कर्म करते रहना चाहिए ओर बाकी सब परमात्मा पर छोड़ देना चाहिए । आप का दिन मंगलमय हो।

मंथन

!! मंथन समय का !! ऐसा नहीं है कि जिस समय को हम खराब मान रहे हैं, या‌ जब हमारा समय खराब आता है और कठीनाईया हमें घेर लेती है तब हमारे आस पास सब कुछ ही खराब हो रहा हो जबकी सत्य‌ यह है कि उस समय हमारे अन्दर इतनी नकारात्मकता भर जाती है की हमें हमारे आस पास घटित हो रही सकारात्मक बातें या घटना दिखाई ही नहीं देती । सकारात्मक सोच वो प्रयास है जो हमें अन्धेरे से उजाले कि ओर ले जाते हैं।

हमे हिम्मत मिलती है कठीनाईयो से लड़ने की और सही मायनों में सकारात्मक सोच से ही हम विजयी हो सकते है हमें हमेशा‌ सकारात्मक सोच से ही कार्यो को करना चाहीये ,चाहे रात कितनी ही घनेरी क्यों न हो आशा का ऐक दीप जलाके रखिये रात कट जाएगी और नई भोर अच्छे दिन जरूर लाएगी। दृढ़ संकल्प, अच्छी सोच ईश्वर में विश्वास और भगवत कृपा हमें नए रास्ते दिखते हैं और प्रयास करने की हिम्मत भी देते है।‌

सभी की भांति मैं भी व्यथित हो गई थी कि अब क्या होगा? यह कोरोना काल तो समाप्त होने का नाम ही नहीं ले रहा है। तभी मेरे चाचा ने मुझे समझाया और उन्हींकी बातों से ही प्रेरित हो उनके शब्दों को यहाँ साझा कर रही हूं जानती हूं आप लोग भी ऐसी ही दुविधा में होंगे जैसे कि मैं।

यूँ तो law of attraction भी यही कहता है जैसी सोच होगी वैसा ही होगा, हम जैसा सोचते रहेंगे नियती वैसा ही हमारे लिए भविष्य में परोसती रहेगी इसलिए सोच में सकारात्मकता रखें थोड़ी सी और हिम्मत रखें जिस प्रकार अच्छा समय ज़्यादा दिन नहीं रहते बुरे दिन भी बीत जाएंगे। इन्ही शब्दों के साथ आज विराम लेती हूँ और फिर मिलूंगी, मंथन चाचाश्री के नए शब्दों और विचारों के साथ। ज्योत्स्ना “निवेदिता”

अंतराल

सुनैना कभी कभी दिनभर उस खाली जगह में लिखती रहती , सब काम छोड़ मोबाइल में ही मन रमता था आजकल जाने क्या चल रहा था उसके मन में। माँ भी अब हार मान चुकी थी जानती थी वो नहीं आने की.. जाने क्या लिखती है अचंभित माँ मन ही मन सोचती।


इधर सुनैना उस रिक्त स्थान पर कभी लिखती कभी मिटाती,
सोचती भेज दे उन्हें और कह दे जो कहना चाहती है,
पूछे की कैसे हैं, खुद की तसल्ली के लिए
खीजकर सोचती भी है टाइम बे टाइम अपने मन की बात लिखती है मिटाने के  लिए..
अपने ही मन से बनाई उनके “मन” की बात, मन ही मन में सोच कर कुछ देर का वीराम ले लेती है ..
सुबह को दिन का,
दिन को रात का,
और
रात को जब वो नहीं सोते हैं तो झल्लाकर
कभी कभी कह भी देती है ..

“सोते क्यों नहीं?..
सो जाइये कुछ पल मुझे भी आराम मिलेगा
यहाँ वहां आपके पीछे तो न भागना पड़ेगा।”

पर आवाज़ है गूँज लेती है…
उस खाली डिब्बे में और उसके मन में
और फिर ..
वही
कुछ देर का अंतराल

और  लिख दिया कैसे हैं आप? ठीक तो हैं? कहाँ थे अब तक क्यों नज़र न आये..
और एक खामोशी से मिटा दिया । #निवेदिता