जनमष्टमी और स्वतंत्रता दिवस 

आज बहुत ही पावन दिन है जब पूरा देश स्वतंत्रता का पावन पर्व और जनमष्टमी का पावन त्योंहार एक साथ माना रहा है । देश की राजधानी दिल्ली में आज के दिन आसमान तिरंगों वाली पतंगो से लबालब डूबा रहता है और देशभक्ति सभी के जज़्बे मैं दिखती है । 

कुछ लमहें हमने भी उन्हीं में चुराए कुछ मस्ती और कुछ भक्ति में सराबोर । भगवान श्री कृष्ण के पराकट्योत्सव पर सुबह से ही मन में जोश था उसे और रंग दिया हमारे “प्रधानमंत्री जी श्री नरेन्द्र मोदीजी” की “न्यू इंडिया “की सोच और “सुदर्शनचक्र धारी मोहन और चरखेधारी मोहन ” के शब्दों की मिठास ने । 


” ना गोली से ना गाली से कश्मीर को शांतिमय बनाना है तो गले लगाओ ” शायद इनहीं शब्दों ने प्रौढ़ और युवा ही नहीं नन्हें बाल गोपालों का मन भी मोह लिया , मेरी बिटिया सुबह से ही मोदीजी के गुणगान करते नहीं थक रही थी की एक पतंग लूट कर उसके मुँह से अनायास ही सत्य निकला “मैंने मोदीजी लूट लिया ” कितना सत्य था ना कटुता ना छल , बस भोलापन पर भोलेपन में वो वह कह गई जो बिलकुल सत्य है।

हमारे प्रधानमंत्रिजी बच्चों के दिल में बसते हैं और मोदीजी के मन को लूटने वाले ये देश की आने वाली वो पीढ़ी है जो उनके न्यू इंडिया की सोच को साकार करेगी । 


जानती हूँ ना मोदीजी  इन शब्दों को सुन पाये ना ही इसे पढ़ पाएँगे उन्हें वक़्त नहीं होगा , परंतु “कुहु” जैसे कितने ही बच्चों के मन में छाप छोड़ने वाले ये उनके सूपर हीरो के लिए वे पथ प्रदर्शक हैं । अपने मन से कही बातों से उनके कोमल हृदय पर वे वो लिख रहे हैं , जो हम माता पिता होकर भी ना सिखा पाएँ शायद । 

“श्री कृष्ण ” के जन्म को अभी कुछ ही समय बाक़ी है सभी साथियों को इस पावन पर्व की बधाई ।हर घर झूले और दही हांडी है साथ ही आज हर कान्हा ने स्वतंत्रता का भगवा पहन रखा है , कुछ झलकियाँ आप सभी के साथ बाँट रही हूँ जो मैंने भी अपने छोटे से ठाकुर बाड़ी मैं सजाई है । मध्य रात्री का शृंगार तो अलौकिक होगा किंतु दिन का भी कुछ कम ना फबा मेरे लाला पे … 


आपकी “निवेदिता”..

बुराई

बुराई है, हाँ बुराई है

सब देखते बुराई हैं ,

खोजते बुराई हैं ,

लिप्त बुराई में ,

जब देखो तब ,

बस ढूँढते 

बुराई हैं |

बुरा है कौन ?

कहाँ बुराई है ?

क्यूँ जाने पर सब ,

कोसते बुराई है ।.. निवेदिता

छलिया

छलिया

मैं मीरा बन तड़प रही ,

वो गोपियों संग रचाए रास,

दूर बसी क्यूँ मीरा भाए ?

जब रहते राधा के पास ;

 मैं प्रेम में जोगन बनी , 

उनके मन को गोपी ही भाए ।

 मैं उनका नाम रटते नहीं थकती , 

उनको मेरा नाम नहीं भाए । 

पूजूँ नित प्रातःनिशि मध्याह्न , 

पर कान्हा तो रहा छलिया

सिर्फ़ दूसरों का ही रहता ध्यान ।। 

“निवेदिता”..

आभार 


व्यवहार कुशलता और माधुर्य,

आतिथ्य सत्कार और मिठास ,

संस्कृति विनम्रता और संस्कार ,

मानो अपना ही है यह इतिहास ,

दोस्त बनाना और निभाना ,

जन्म से अपने ख़ून में थी । 

मेहमान घर आए तो ,

घर सजाओ – ख़ूब पकाओ,

मनहवार कर कर के खिलाओ,

जैसा है वैसा ही अर्पण करो ,

आतिथ्य में कहीं कमी न हो ,

तन मन धन से लग जाओ ।

ऐसा भाव मेरे देश का है ,

आगंतुक अतिथि भी देवता है ,

और सच बोलूँ तो अहम मेरा ,

इसरायल ने आज तोड़ा है ,

हाथ मिला सकता था वो ,

पर हाथ जो ऐसे जोड़ा है ।


हमारे प्रधान सेवक की सेवा करने,
मानो  वो बिन जूतों के दौड़ा है ।

रूप रंग नहीं प्रेम का कोई ,

ना मित्रता की कोई जाती है ,

दोस्ती के रंग उन फूलों में,

बनकर यादें, महकाती हैं ।

दोस्ती की ऐसी तस्वीरों से,
दुश्मन के दिल जला रहे ,

झूठ की चादर ओढ़े ,

गीदड़ भबकि मार रहे ,

जब अंगूर खट्टे दिखने लगे,

खिस्याएँ चीनी खंबा नोच रहे । 

ऐसा आतिथ्य सत्कार पाकर ,

एक सवाल मन में कौंधा है ,

हम जैसा कहूँ ,या बेहतर है ?

यह कहना तो मुश्किल है ,

बस मेरा “आभार “ही उत्तर छोड़ा है । “निवेदिता ”


*Gratitude from Me and my Country to Israel and Prime Minister Sh. Benjamin Netanyahu . 

ना पाया 

आवाज़ तेरी कानो में गूँजती ,

पर आँखों को दिख ना पाया ।

चाहत पाने की ,बिजली सी कौंधी,

अश्रुओं का बहाव थम न पाया ।

विरह की बरखा ऐसी बरसी ,

बाहों में भी सिमट ना पाया ।

ऐसे छलके वो दो प्याले,

पलकों से फिर संभल ना पाया ।

देख मेरे मन के अगन को ,

आसमान भी रुक ना पाया ।

सिमट गया बादलों में ऐसे ,

फिर बरसने से रुक ना पाया ।

मन भी रोया जैसे बरसा .. 

चाहकर तुझको भूल न पाया .. “निवेदिता ”

Talks over coffee

“A happy Wife is a happy Life” 

1.Brew a cup of coffee for her and surprise her.

2. Talk to her.

3. Listen to her.

4. Look into her eyes when she speaks.

5. Make her feel she is as much important to you as much you are to her. 

You can have lot more over a cup of coffee .. 

Trust me .. ☕️☕️

जोंक 

जोंक चिपक जाए तो उतरना मुश्किल है नमक का प्रयोग करें और समय रहते ही हटा लें वरना सारा ख़ून चूस लेगी । 

कुछ रिश्ते भी जोंक के सामान ही होते हैं चिपक जाएँ तो हटाना मुश्किल है समय रहते अगर ना छोड़ें तो आगे जाकर विकराल रूप ले लेती हैं । 

अपने रिश्तों को बनाते समय ध्यान देना बहुत ज़रूरी है ।