नन्ही बिटिया

नन्ही बिटिया ,

नन्ही तुझको मैंने पाया

मेरे गोद की चंचल छाया,

चाँद से प्यारा ,

अंखियों का तारा

दूर सुधूर ,

क्षितिज सा नज़ारा,

नज़रों में फैला उजियारा ,

नयन तारों सी टिमटिमाती,

नन्ही कोंपल प्रस्फुटित ,

घर -आँगन महकाती,

कूकती कोयल सी “कूहू”

भागे नन्ही हिरणी हो ज्यूँ ।

मेरी पलकों में छाया,

सूर्या की किरणों में समाया ,

स्वप्निल सपनो का सरमाया ,

उज्जवल स्वर्णिम काया ,

उस पत्थर मैं भी मैंने तुझको पाया ,

जिसे सबने “भगवान “ बनाया ।”निवेदिता”

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केसरिया

सर्द सुबह थी,

हाथ बर्फ़ीले,

नर्म स्पर्श से,

उसके हाथ गर्म हुए,

और मेरी चाय .. “केसरिया “

प्याला एक, हम दो

एहसास एक,हम दो

कब दो एक हो गए,

और प्यार अमृतुल्य हो गया,

और मेरी “चाय “ .. केसरिया

उबलते पानी में,

पत्ती का घुलना,

अदरख के संग,

इलायची का मिलना,

दूध के संगम से,

मेरी चाय .. केसरिया

दो घूँट ज़िंदगी के,

जो उसके होठोंसे,

मिले तो उसके होंठ ,

लाल से सुर्ख़ लाल हुए ,

और मेरी चाय .. और “केसरिया”..(c)निवेदिता

He met me

He met me , I met him ……………

have not seen these eyes

Someone who is so beautiful

At heart soul and everything

I am happy because

Every color started to fade

in front of his whim

Tears vanished only i could see

Is lucky me

False shattered, Truth is Shining

Found a glittery diamond

see everyone Its him ……………

Life that seemed

to be incomplete till now

Suppose he has got an execution

To the Dark night and

A moon found on this new moon day in him …………… ..

Long is the journey of life

and my mind is his mind

With whom I am looking forward

I got that hand

I am very happy today,

Because he met me ,

And I , met him….. “Nivedita”

तुमने

वो हूँ ,जिसे समझा नहीं तुमने,

मैंने माना ,जिसे माना नहीं तुमने,

तू भगवान है मेरा ,

मुझे दास भी माना नहीं तुमने,

मेरा जीवन तुझसे ये मैंने माना,

तन-मन से अपनाया,

बसाया आत्मा में तुमको मैंने

एक पल भी मुझे अपना बनाया नहीं तुमने …

स्वप्न बुने मैंने जो मात्र मेरे ही थे ,

नहीं कोई सरोकार है तेरा ,

मुझे “मानव”से निवेदिता बनाया भी तुमने,

नहीं इज़्ज़त कोई मेरी जबसे बताया है तुमने ..

टूट गए वो स्वप्न बिखर गए,

जिन्हें कभी दिखाया भी था तुमने..

जीवन मैं एक स्वाभिमान ही था मेरा,

गर्व इज़्ज़त से कमाया , था ऐसा अभिमान,

शायद अहम था जिसे मिटाया भी तुमने..

आज ना देने को बचा ना खोने को,

ना जीने को ना हँसने को ..

रो रो के जीना , सिखाया भी तुमने .. “निवेदिता”

शांति

जब तूफान के बादल ,

मेरे चारों ओर उबाल लेंगे,

और बिजली आकाश का

वीभाजन करेगी ,

जब हवा की चोंच ,

मुझ पर आक्रोशित होंगी ,

और जीवन का समुद्र ऊफान पर होगा ,

जब आशंकित दिल मेरा निरस्त होगा

मैं और मेरा मन आशंका से भरा होगा ,

कहीं से ठंडी हवा का झोंका आएगा

मझे आश्वस्त कराएगा , मुझे और

मेरे मन को , शांति और आराम देगा ।।

जब जीवन की आपाधापी में ,

उलझने होंगी ..

और मेरा विश्वास कम हो रहा होगा ,

और मेरा दिल दर्द से ,करहा रहा होगा ,

जब रात भयावह काली और अनंत होगी ,

तब मुझे एक चांदी की चमक मिलेगी,

चमकते चाँद की “ज्योत्सना “ यूँ प्रतीत होगी ,

ज्यूँ ,काले आकाश से परे, 

सब चीजें होंगी ,

धरती ऊपर को देखती अचम्भित होगी ,

मोहित उस कांति पे ,

मैं ही नहीं ,

धरा भी होगी .. “निवेदिता”

स्वप्न/Dreams

स्वप्न देखना हमारा धर्म है ,सुंदर स्वप्निल आकाश में ,

पंख फैलाएँ स्वच्छंद उड़ें ,

यहाँ उड़ना हमारा कर्म है |


सपनो के सौदागर बहुत मिलेंगे ,

जो सपने बाँटेंगे मुफ़्त में ,

उन्हें परखें मत, रहें खड़े ,

ऐसा करने में क्या शर्म है ?


सपनो के हत्यारे भी मिलेंगे ,

नहीं कसर स्वप्न को मारने में ,

वो रहेंगे हाथ धो ,पीछे पड़े ,

अडिग हो उनसे लड़ना, यह अधर्म है ।


सौदागर हों या हत्यारे ,

दोनो सपनों को मारने में हैं लगे,

वे एक वास्तविक खतरा हैं; 

और वे हर जगह पत्थर से अड़े 

नहीं किसी की फ़िक्र बड़े बेशर्म हैं ।निवेदिता..


Dreaming is our right ,

In the beautiful dream sky,

Spread the wings fly free,

Flying in dreams is our karma.


You will find many lairs

Who make lies as dreams,

Do not trust them, stand up,

don’t be ashamed


You will meet the killers 

Who kills dream 

Don’t let your dreams die,

They will try 

fight stubbornly.


Dealer or killer

Both are engaged

 in killing the dreams

They are a real danger;

And they stack everywhere

Shameless they, don’t care .. Nivedita