दर्द

कुछ दोस्तों के पोस्ट पढ़कर जो मुझे आज एहसास हुआ कि लोग अपनी ही सोच से लोगों के खुदगर्ज बर्ताव से व्यथित हैं, 

उनके भावों में रोष है कष्ट है पर कहीं वापिस खड़े होकर चल पड़ने को तैयार है। 

मेरा मन व्यथित हुआ फिर सोचा नया क्या है , कभी मैं कभी कोई और सब के सब तो इन विचारों से ओत प्रोत होते हैं अगर कोई बचा सकता है तो वह ईश्वर जिनके शरणागति होकर हम भंवर से निकल सकते हैं । उन्हीं भावों को चार पंक्तियों में पिरोया है , आशा है मैं उस दर्द की  अभिव्यक्ति में सफल हुई हूँ । 

​आज आखिरी होगा , सब आखिरी ..

जो खबर है मुझे , मेरे नाथ ,नाद शक्ति मेरी बंद कर दो,

 डर है कि कष्टों के भंवर में फंस जायेगा कोई । 
वो खेल यूँ ही भावनाओं से खेलेगा ,

मुझे सबल करो,बचा सकूँ ,

 लूटके उसे ले जायेगा कोई ।
चाहके भी रोष से मेरे बच न पायेगा,

फिर चाहे सामने वो हो, या और कोई ।
बहुत भागी हूँ, अब और चला नहीं जायेगा, 

मैं थक गई,और नहीं ,चाहे भागे और कोई ।
पेट है या तंबूरा ,जो भर नहीं पायेगा,

निष्काम प्रेम मेरा ,यहाँ नहीं समझ पायेगा कोई ।

मैं तेरे शरनागत अब चाहे वो रूठे या और कोई ।। ..           ” निवेदिता “

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61 thoughts on “दर्द

  1. नहीं यह ज़िन्दगी की धारा में बहती हुई उस लकड़ी की तरह है जो कहीं पत्थर में अटक गई हो । ज़िन्दगी बहुत विस्तृत है , जहाँ अभी इस टुकड़े को और बड़े बड़े संकटों से जूझते हुए संघर्षरत बहते जाना है और अंततः जाकर अथाह सागर में मिल जाना है

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  2. बहुत अरसे बाद दुखों की भी इतनी सुंदर प्रस्तुति देखी। मन अगर व्यथित हो तो इन शब्दों को पढ़ के प्रोत्साहित हो जाए। दर्द में भी प्रेरणा है। आपके अलावा यह किसी और के बस की बात नहीं, ढेरों बधाई स्वीकार करें

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  3. भावनाओं को शब्दों में पिरोकर एक अति सुंदर रचना का सर्जन करना ही आपकी सबसे बड़ी खासियत है।
    आपको साधुवाद 🙏

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        1. Don’t you worry you know when the right time will come you will clear in a go , just dont leave keep going never leave hope . Koi kumbh ka mela nahin hai ki char sal pehle nahin aayega , har cheh mahine mei exams aajate hain dete rehna

          Liked by 1 person

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