Acid Burns 

I was forced to die ,

But my spirit kept me alive,

rising from the ashes,

Slowly and gradually ,

I will start living again,

the pain of being burned ,

Will heal with time, 

But whenever I will see ,

My reflection in the mirror,

I will be horrified,

Again will feel the same ,

Agony if burns will rise,

Rage will rise,

The blood in my veins,

Will boil like the heat of Sun,

The wounds they gave ,

Will get healed ,

But the scars will remain,

Throughout my Life , 

I will never be the same again .. Nivedita 

P.S. : I hope that such henious act will come to a complete end soon.

हम हो न हो ये गुलशन रहेगा

A Tribute to the students killed at Pakistan . The barbaric act couldn’t stop me from sharing it with all

“हम हो न हो ये गुलशन रहेगा “।…..

पाठ ऐसा शिस्क्षकों ने पढ़ाया ही था

अंतिम लेख किसी  मासूम ने लिखा था,

पांच साल का हुआ था न जाने को जी चाहता था

माँ ने भेजा था उसको ,कहाँ जी मानता था

फिर भी यहि सोचके दिल को तसल्ली  दी थी

स्कूल को गया है नहीं जंग  कहीं है लड़ने

वहीँ कहीं यही सोच लेके के नन्हा खुश हो रहा  था ,

या फिर किसी बिल्डिंग का करूँगा नव निर्माण।

टीचर बनुगा ,पायलट बनूँगा या पिता की तरह जवान ,

सरहद पे लड़ मिटूंगा  बनुगा पाकिस्तान की शान ,

था उन मासूमों का  मुसल्लम ईमान।।

किसे मालूम वह शब्द आखिरी  शब्द होंगे

जो बच गये  वह ज़नाज़ों के मेलों में शामिल होंगे

दूध सरकार ने पिलाया उन सांपों को करने खुद का कल्याण

आज आस्तीन पे लौटें हैं वही बनके हैवान।।

उन मासूमों को कतल करने वालों क्या पाया है तुमने

हे खुदा के घर जाना ज़रा तो तहफीक करते।।

रूह कांपती है घिनौना  मंज़र को देखके,

आंसू नहीं थमते रोये हम फफक फफक के,

उन माओं के उजड़े हुए घरोंदे देख के मन यूँ रो रहे ह

जिन्हे हो  तुम दुश्मन समझते रोनें को तुम्हे वही कंधे दे रहे हैं

अब तो सम्भालो और जागो  न वह तालिबानी

न कोई  धर्म जानते हैं नहीं कोई इमांन न धर्म मानते हैं

जो कोई इंसान ऐसा हो तो उसे हम हैवान मानते हैं

जल्लाद मानते हैं , शैतान मानते हैं

उन्हें इंसान मानना ही गुनाह मानते हैं  । …’निवेदिता’