जीयो और जीने दो 

नन्ही मुस्कान को ज़रा पलने दो ,

मत तोड़ो उसे ,अभी खिलने दो ,

नयी कलियों को प्रस्फुटित होने दो ,

जो है सो है जैसा है उसे रहने दो
,

रज़ा उसकी मर्ज़ी में होने दो,


सुख दुःख के फेर शाश्वत है ,चलने दो ,

जो कहते हैं उन्हें कहने दो ,

सुनो सबकी, अपने मन की होने दो ,

बहते हुए भावों को ,अविरल बहने दो 

फल अच्छा या बुरा , मिलने दो 

ख़ुश रहो और ख़ुशी से रहने दो 

ज़्यादा नहीं तो बस “जियो और जीने दो “..  “निवेदिता “


P.S. : बेटियाँ  बाग़ में खिलती कलियों के समान हैं उन्हें प्रोत्साहित करो और आगे बढ़ने दो । बेटी को बचाओ और उन्हें पढ़ने दो ..  

हे राम!नहीं श्री राम कहो

राम लला को हम हरदम याद करते हैं या कहे प्रभू को पर दुखी स्वर में क्यों। गर हरदम करें तो शायद दू:ख हो ही न । बस इतना सा प्रयास और निवेदन .

IMG_20151230_170229399हे राम!नहीं श्री राम कहो,
हे , !दुःख करुणा का सूचक है,
जो याद प्रभू को करना तो,
दुःख में ही क्यूं याद करें,
नाम राम का हर पल लो, 
पर सुख में भी सुमिरन करो,
श्री , लक्षमी की का द्यूतक है
हर पल राम के चरणों में नमन🙏
नाम लेने से अगर सुख मिले,
तो हे !राम ,नहीं श्री !राम कहो,
क्योंकि श्री !,  हे!का पूरक है…. “Nivedita”