तांत

रेशम के धागों में बुने हुए
किसी तांत की साड़ी में
समय की परतों में
सिमटी हुई “वो”
साड़ी की  सिलवटों  में
गुलाब की पंखुड़ियों की तरह
बचपन से जवानी तक
उसका एक कली से फूल बनना
यौवन की अल्हड़ अठखेलियां
प्रेम में हंसना खिलखिलाना
और फिर प्रौढावस्था  तक
फूल के खिलने से बिखरने तक
कजरारी आंखों से ख्वाब झांकते रहे
उसके आंचल में पलते रहे
तब तक के जब तक तांत के तार
तार तार होकर फट न गए..  ज्योत्सना “निवेदिता”

Note: Tant sari is a traditional Bengali sari, originating from the Bengal region in the eastern part of the Indian subcontinent, and usually used by Bengali women.

The Poem is about a woman how she blooms from a bud to a flower and till she dies she keep dreaming and manages all the social formalities bound in relationships and social boundaries.