मन


मन बंजारा डोल रहा है
प्रेम शहद मद घोल रहा है
मीठी मीठी बातों से वो
ज़हर में मिश्री घोल रहा है

ना जाने क्यों रूष्ट हुआ है
मुझसे मुंह अब मोड़ लिया है
जाने अंजाने जो भी था वो
मन ने सब कुछ छोड़ दिया है


मन ही मन की बातें जाने
सुनना जाने  सुनाना जाने
मीठे कड़वे भेद ये जाने
हंसाना जाने रुलाना जाने 

दिल जाने दिमाग भी जाने
कहना जाने छुपाना जाने
यादों में जीना भी जाने
कभी यादों से भुलाना जाने
मन की बातें मन ही जाने।। ज्योत्सना #निवेदिता