मंथन अच्छी बातों का

काका श्री से कल फिर से भेंट हुई बातों बातों में बात छिड़ती चली गई, उन्होंने एक बात कही जो मेरे मन को भा गई तो मेरे मुँह से सहसा निकल पड़ा यह अच्छी बात कही काका..

काका कहने लगे !! अच्छी बातों की यही खासियत होती है कि जब भी पढ़ो, सुनो या देखो अच्छी लगती हैं । पर ये केवल कहने या लिखने की बातें नहीं होती हमें इन्हें अपने आचरण में लेना चाहिए अच्छी बातें दवाईयों की भांति होती है जब तक हम इन्हें स्वयं पर इस्तेमाल नहीं करोगे तब तक यह हमें फायदा नहीं देंगी इस लिए यदि हम चाहते हैं कि अच्छी बातें हमें फायदा पहुंचाने का काम करें तो हमें इन्हें अपने जीवन में उतारने की जरूरत है अर्थात स्वयं ग्रहण करने की आवश्यकता है कहते हैं यदि हम‌ दुसरो का भला करेंगे तो हमारा भी भला ही होगा नहीं विश्वास तो करके देखों किया ऊनका इतिहास देखों ।

हमें अपने आज पर ध्यान देना चाहिए और भविष्य की ज्यादा चिंता नहीं करनी चाहिए हमें तो बस सत्कर्म करते रहना है बाकी सब सम्हालने के लिए तो भगवान हैं।

देखिये संतों ने बहुत अच्छी बात कही है: “इस संसार की गतिविधियों पर नहीं अधिकार किसी का है जिसको हम परमात्मा कहते ये सब खेल उसी का है” इस लिए हमें अपना कर्म करते रहना चाहिए ओर बाकी सब परमात्मा पर छोड़ देना चाहिए । आप का दिन मंगलमय हो।

5 thoughts on “मंथन अच्छी बातों का

  1. Wow! This is great.. you made the effort to read it 🙏🙏Thank you accept my gratitude.
    As said by saints why worry?
    1. If you cannot do anything and you know that, why worry? Leave it on God
    2. If you can do something then why worry? work hard ..
    Just pray to God and let the worry go.. 🙏

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