गुजराती बोल 🙏

दीपावली पर्व को हम प्रतिवर्ष अत्यंत धूमधाम से मनाते आए हैं परंतु इस कोरोना काल में क्या हम हमेशा की तरह उसी हर्षोल्लास से सुचारू रूप से इसे मना पाएंगे?
इस साल  महामारी के कारण दो गज की दूरी रखना और मास्क पहनना आवश्यक है, ऐसे में लोगों से मिलना मिलाना भाईचारा बढ़ाना खरीदारी करना इन सभी बातों पे इस महामारी का असर पड़ेगा, परंतु हमें यह याद रखना चाहिए कि जिस प्रकार प्रभु श्री राम कठिन से कठिन समय में भी अपना संयम रखते हुए वनवास के नियमों का पालन करते रहे उसी प्रकार हम भी उन्हीं के दिखाए  मार्ग का अनुसरण करते हुए यथाशक्ति इस पर्व को मनाएं।
  इस साल ध्यान रखने योग्य बातें यह है कि हम लोग जो आर्थिक तौर पर सशक्त है और त्योहार को धूम धाम से मनाने में सक्षम हैं उन्हें अपने से कम समर्थ लोगों की सहायता  करते हुए उनकी आवश्यकता का ध्यान रखना है। ऐसे बहुत से लोग होंगे जिनके घरों में रात का चूल्हा भी नहीं जलता होगा तो उन लोगों के लिए आप जो बन पड़े वह करें और उनकी आंखों में खुशी का दीप जलाएं
जैसे कि हमारे प्रधानमंत्री जी ने “वोकल फ़ॉर  लोकल” का आवाहन किया है हमें उनके बताए इस मार्ग पर चलते हुए अपना योगदान अधिक से अधिक देने  का प्रयास करते हुए  सिर में इस्तेमाल की जाने वाली कंघी से लेकर पैरों में  पहने जाने वाली चप्पल तक जहां तक हो सके स्वदेशी ब्रांड  ही खरीदना है  इससे हमारे स्वदेशी ब्रांड भी ग्लोबल ब्रांड बन पाएंगे।
इस दीपावली देश के लिए देश वासियों के लिए और अपने अपनों के हित के लिए सभी नियमों की अनुपालना करते हुए प्रभु श्री राम के अयोध्या नगरी अपने जन्म स्थल श्री राम जन्मभूमि में लौटने की ख़ुशी सभी के साथ मिलकर मनानी है। जय श्री राम “निवेदिता”

मंथन अच्छी बातों का

काका श्री से कल फिर से भेंट हुई बातों बातों में बात छिड़ती चली गई, उन्होंने एक बात कही जो मेरे मन को भा गई तो मेरे मुँह से सहसा निकल पड़ा यह अच्छी बात कही काका..

काका कहने लगे !! अच्छी बातों की यही खासियत होती है कि जब भी पढ़ो, सुनो या देखो अच्छी लगती हैं । पर ये केवल कहने या लिखने की बातें नहीं होती हमें इन्हें अपने आचरण में लेना चाहिए अच्छी बातें दवाईयों की भांति होती है जब तक हम इन्हें स्वयं पर इस्तेमाल नहीं करोगे तब तक यह हमें फायदा नहीं देंगी इस लिए यदि हम चाहते हैं कि अच्छी बातें हमें फायदा पहुंचाने का काम करें तो हमें इन्हें अपने जीवन में उतारने की जरूरत है अर्थात स्वयं ग्रहण करने की आवश्यकता है कहते हैं यदि हम‌ दुसरो का भला करेंगे तो हमारा भी भला ही होगा नहीं विश्वास तो करके देखों किया ऊनका इतिहास देखों ।

हमें अपने आज पर ध्यान देना चाहिए और भविष्य की ज्यादा चिंता नहीं करनी चाहिए हमें तो बस सत्कर्म करते रहना है बाकी सब सम्हालने के लिए तो भगवान हैं।

देखिये संतों ने बहुत अच्छी बात कही है: “इस संसार की गतिविधियों पर नहीं अधिकार किसी का है जिसको हम परमात्मा कहते ये सब खेल उसी का है” इस लिए हमें अपना कर्म करते रहना चाहिए ओर बाकी सब परमात्मा पर छोड़ देना चाहिए । आप का दिन मंगलमय हो।