अंतराल

सुनैना कभी कभी दिनभर उस खाली जगह में लिखती रहती , सब काम छोड़ मोबाइल में ही मन रमता था आजकल जाने क्या चल रहा था उसके मन में। माँ भी अब हार मान चुकी थी जानती थी वो नहीं आने की.. जाने क्या लिखती है अचंभित माँ मन ही मन सोचती।


इधर सुनैना उस रिक्त स्थान पर कभी लिखती कभी मिटाती,
सोचती भेज दे उन्हें और कह दे जो कहना चाहती है,
पूछे की कैसे हैं, खुद की तसल्ली के लिए
खीजकर सोचती भी है टाइम बे टाइम अपने मन की बात लिखती है मिटाने के  लिए..
अपने ही मन से बनाई उनके “मन” की बात, मन ही मन में सोच कर कुछ देर का वीराम ले लेती है ..
सुबह को दिन का,
दिन को रात का,
और
रात को जब वो नहीं सोते हैं तो झल्लाकर
कभी कभी कह भी देती है ..

“सोते क्यों नहीं?..
सो जाइये कुछ पल मुझे भी आराम मिलेगा
यहाँ वहां आपके पीछे तो न भागना पड़ेगा।”

पर आवाज़ है गूँज लेती है…
उस खाली डिब्बे में और उसके मन में
और फिर ..
वही
कुछ देर का अंतराल

और  लिख दिया कैसे हैं आप? ठीक तो हैं? कहाँ थे अब तक क्यों नज़र न आये..
और एक खामोशी से मिटा दिया । #निवेदिता

हिंदी दिवस

माँ वसुधा के माथे की बिंदी

भारत के रज कण में बसती

माँ वसुंधरा के माथे की बिंदी

जनमानस के ह्रदय में रमती

आर्यव्रत अभिदान है “हिंदी”

राजभाषा हुई यह घोषित

विश्व पटल पर मान बढ़ाया

निज गौरव अभिमान हमारा

हिंदी हैं हम, वतन है “हिन्दुस्तान हमारा”

ज्योत्स्ना “निवेदिता”

Smile

your smile to me :

you know the art of maneuvering your smile in majestic ways to make things fall in right place..

I am here to share a smile therapy ..

When we were kids we used to share a quote saying

“A mile between two S is smiles ” .

So true isn’t it?

There should be no reason to smile and if there is then you can walk miles and miles wearing a Smile on your face. A child like smile or a smile we are viewing from our childhood or our parents childhood