लड़ाई

जाने क्यों सब इतने कड़वे हो चले हैं,
करेला- नीम भी मीठे लगने लगे हैं,
क्या बदल मैं गई ? या वो बदल गए हैं?
सत्य यह है कि बदल हम सब गए हैं,
सब लड़ रहे हैं , गर्व है हम लड़ लिए हैं ,
न स्वयं से न अहम से अपितु स्वजनों से,
जो स्व थे अब जन हैं और लड़ रहे हैं ।। #निवेदिता

12 responses to “लड़ाई”

  1. Beautifully expressed the inevitability of change and with it the fight both internal and external. Only those who realise the change within themselves will be happier, earlier.
    In life, where there is no time to love, where is the time to fight.
    जो स्व थे अब जन हैं और लड़ रहे हैं……..This line is universally true…..painful though….

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    1. Thank you Neeraj ji for stopping, reading and appreciating. You are right today everyone is fighting with so many seen and unseen reasons. I am glad you liked it. 😇🙏

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      1. Jyotsana I have read a couple of them more and fully relate with your expressions. Will comment on them in a while.

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  2. So appropriate, मैंने भी देखा है मेरे करीबियों को मेरे अपनो को लड़ते हुए, बेमतलब कड़वा बोलते हुए, बेवजह पंगे लेते हुए, उनका हूबहू चित्रण किया है अपने शब्दों से।

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    1. यह आत्म कथा है, मैं जो थी वो रही नहीं जो हुन वो मैं थी नहीं पता ही न चला कब यह अहम का बीज मुझ में घर कर गया। जो जैसे था वैसे ही रह सकते था अगर मैं न बदलती पर बदलाव अटल है और उसे कोई नहीं रोक सकता। और मुझसे अपने हर किसी के इर्द गिर्द होते हैं आपने भी देखा ही होगा मुझसे कटु चेहरों को।

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  3. so true. well penned!

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    1. Thank you for the appreciation really.

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  4. It’s beautiful, it’s a fact, but it’s painful too. The reasons are not known, but we can resolve, because it is amongst us.

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    1. समय समय की बात । सब कुछ बदलता रहता है कभी परिपेक्ष्य भी बदलता है । अपने तो अपने ही रहते हैं ;
      समझ फेर या समय फेर हो सकता है लेकिन बदलकर सब फिर आसान हो जाता है ।

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      1. समझने की आवश्यकता यह है कि हम अपनो से ही लड़ सकते हैं गैरों से नहीं। आवश्यक नहीं कि हमेशा हम सही हों पर जब दुख पड़ता है तो भगवान के बाद कोई काम आता है तो वह अपने ही हैं।

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    2. Very Well said Di but I wrote this on me relating to today’s circumstances going on around us. For example JNU. The kids fighting with each other are ours but none ready to let go the ego and hence letting themselves used.

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