शब्दाजंलि

छोड़ आया मेरी माँ को मैं,
माँ तेरी रक्षा करने को मैं,
नज़र उतारी मेरी माँ ने, मेरी,
दुश्मनों पर नज़र रख पाऊँ मैं,
दी माँ ने मुझको कसम तेरी,
ना कभी पीठ दिखाऊँ मैं।

वो बेटी है भारत माँ तेरी ,
उस माँ का बहाद्दुर बेटा हूँ मैं।
हे माँ तुझपर मन अर्पण,
तन अर्पण-स्वजन अर्पण,
जीवन समर्पण करता हूँ मैं ©ज्योtsna #निवेदिता

Joy

The Happy kid in me,
Anxious to see,
The World beside me..
The flower and bee,
The sky and tree,
The pond and river,
The fear and waiver,
The water and splash,
Joy in a flash,
The winter, the spring,
The autumn that bring,
Truth and reason,
Rejoice in season,
The night and Dawn,
The Happy and Frown,
The back and forth,
To make it worth.. (c) ज्योtsna “Nivedita”

PS: Photo Credit Ramesh Menon

परी

एक तेरी हंसी,
ही मेरा खिलौना है,
जानबूझकर तेरा,
मुझको चिढाना,
मेरे खीजने पर,
तेरा खिलखिलाना।

उठ कहूँ तो जानकर बैठना,
करे वही जो करदूँ मना,
नाच नाच कर चलना,

कहूँ धीरे,तो और तेज़ कूदना,
मेरी सूनी बगिया तुझसे हरी,
मेरी चिड़िया मेरी प्यारी परी।

आज सब सुस्त है- सूना सा
रूठा सा देखो ये मेरा जहान
घर भी तुझसे ही बनता मकान
भातीं है मुझको तेरी बदमाशियां
तेरा नटखटपन, तेरी शैतानियां,
तेरी मुस्कान, तेरी अठखेलियां।

Peacock

In the Sun Shine,
After the rain ,
She opens her wings,
Flaunting her feathers,
bright and vibrant
Pearls around her neck
Diamonds in tiara,
Turquoise, emerald and sapphire,
All over the wings…
Proud she..
Beautiful She….

She thought so..
Then dropped a pearl,
From the neckline,
Oh! She saw the pearls,
On the floor,
She bend to collect,
Ah! she tried,
And she cried..
Pearls were all over,
On the floor
Near her claws..
She saw the ugly floor,
Or the claws,
Poor She ..

#nivedita
#peacock

गुरु/Guru

गुरु गुड़ ही रह गया चेला शक्कर हो गया।

गुरदेव परम्ज्ञानी परन्तु चेलाजी उनसे भी आगे निकल गए,

प्रश्न यह है कि गुरु कौन होते हैं?

शिक्षा देने वाले शिक्षक..

ज्ञान देने वाले गुरु..

गुरु विद्यार्थी चुन सकते हैं

वैसे ही विद्यार्थी भी गुरु चुन सकते हैं।

न जाने राह में चलते चलते कब हम ऐसे गुरु से मिल जाएं जो हमें गोविंद की अनुभूति कर जाए। हो सकता है वह हमें परब्रम्ह संग स्वब्रम्ह की अनुभूति करा जाए।

गुरु गोविंद के दर्शन कब कहाँ कैसे करवा दे क्या पता और कब स्वयं को हम उस गोविंद की राधा मान बैठे। #निवेदिता

The disciple has outgrown his Master. The Master is very learned but his disciple has become more knowledgeable.

The question that arises is

Who is aGuru?

The Teacher or the Preacher?

The one who teaches is a teacher,

the one who gives knowledge is a Guru.

A Guru can chose his student,

the same can be done by a student.

Guru Dron never claimed Eklavya as student but Eklavya did …

We never know, when someone, in the journey of life, becomes our Guru and shows us the Almighty, i.e.,

Shows us Govinda and it may so happen that in the process we may get awareness about the ‘Swa-Brahma’ or the God that resides within.

Guru may shows us our Lord at any time, place and manner.

We might start to have the feeling of oneself being Radha of Sri Govind without even realising it. #Nivedita

लड़ाई

जाने क्यों सब इतने कड़वे हो चले हैं,
करेला- नीम भी मीठे लगने लगे हैं,
क्या बदल मैं गई ? या वो बदल गए हैं?
सत्य यह है कि बदल हम सब गए हैं,
सब लड़ रहे हैं , गर्व है हम लड़ लिए हैं ,
न स्वयं से न अहम से अपितु स्वजनों से,
जो स्व थे अब जन हैं और लड़ रहे हैं ।। #निवेदिता