मुस्कुराहट

मुस्कुराहट वो धन है

जो बाँटने से बढ़े और

पहनने वाले को अमीर

और मिलने वाले को

मालामाल कर दे ..

उदासी को दूर करे

चहरे को रोशन और

ग़मों को मिटाकर जो

बूढ़ी हसरतें जवान कर दे..

#निवेदिता

कलम

कीलक से कलम बनी,

कलम ही स्त्रोत ज्ञान भंडार,

ढाल बने कभी, कभी बने तलवार,

शब्दबाणों के कटु तीरों से,

करती अराजकता पर वार।

शूरवीर हों या धनवान,

क़लम से कोई नहीं बलवान,

शत्रु-समूह में त्राहि मचाती,

अस्त्र-शस्त्र करती नाकाम|

कोर्ट कचहरी हो या दफ़्तर,

पत्रकार या सरकारी अफ़सर,

सभी चलाते क़लम निरंतर,|

क़लम बिना ये सब बेजान

कवि ह्रदय के भावों को ,

उमंगो और कल्पनाओं को,

नव आशा पर हो सवार,

क्षितिज के पार ले जाती,

उम्मीदों के दिए जलाती|