Canvas

When your mind is not working let your hands and your brush work ..

when your words are not painting let the brushes paint the canvas ..

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I “मैं”

जानती हूँ टूट चुकी हूँ , broken I am , I know….

Few friends took advantage of my feelings my innocence..

जिन्हें मैंने दोस्त माना उन्होंने मेरी भावनाओं के साथ खेला ..

I was married he asked me to get married again .. I controlled a lot I got Carried away..

शादीशूदा होते हुए भी उसने मुझसे शादी के लिए पूछा ।

मैं शायद भावनाओं में बह गयी ।

I never knew my own friends playing on me .. He said she is obsessed with a hero who is just not a successful one but she wants to be around .. I Said No they are my friends .. when I asked him I don’t wanted to be physically around him I denied he was just seen playing around the same friend he said is desperate about the Hero .. in my words my Hero .. in his words ” Flop Third grade Drunken Hero ”

Lol 😂 😂 ….

मुझे पता था मेरे दोस्त मेरे साथ खेल रहे हैं ।उसने कहा वो लड़की उस हीरो के “आँचल” में “होश” गवाँ बैठी है जब मैंने रोष जताया और उससे शारीरिक तौर पे संलिप्त होने से माना किया उसने अपने “आँचल” में उसे लपेटना शुरू कियाजिसे वह कुछ दिनो पहले किसी तीसरी श्रेणी के हीरो के संलिप्त होने का लांछन लगा रहा था ।।

वाह रे मेरे मन । मनु: स्मृति 😂😂😂😂😂

निवेदित” Nivedita “। “निवेदिता”

ps : It is A fictionstory my first try in writing ✍️ fiction short stories read the next part hope you like it.

यह एक काल्पनिक कहानी है , पहली कोशिश है अभी अधूरी है आशा करती हूँ आप पढ़ेंगे और पसंद करेंगे ।

नमन किसे ?

क्या मात्र वे शहीद हीं हैं जिन्हें हमें नमन करना चाहिए ? क्यूँकि जो जीवित हैं उन्हें हम मात्र शिकायत करते देखते हैं। कुछ दिनों से कुछ लोगों को पढ़ रही हूँ दुःख होता है यह जानकार की लोग बस हमारी आस्था और विश्वास पर अपने मनोरंजन और कामनाओं के भुट्टे सेकने आते हैं ।

हम आप जितने समझदार ना सही ना हमारे कई चेहरे हैं , उन जितने .. पर जनाब कुछ तो सेना ने आपको भी दिया होगा ज़्यादा नहीं तो तन ढँकने जितना वस्त्र और पेट भरने जितना अन्न? क्यूँ अन्नदाता के पेट पर लात मार रहे हैं ।घिन्न आती है आप जैसे विचारधारा वाले लोगों पर और उसे समर्थन देते वरिष्ठ अफ़सरों पर ।

अगर कोई मुझसा अनभिज्ञ आकर आपत्ती जताए तो पूरी की पूरी टोली समर्थन में खड़ी होती नज़र आती है कहतें हैं भावनाओंकी क़द्र करो वे बूढ़े हैं । बुज़ुर्गों को तो बुज़ुर्ग बनना चाहिए मार्ग दिखाना चाहिए । उन्हें पढ़करना तो कोई हम जैसा सेना में न आना चाहेगा।

आपसे तो हम अच्छे हैं जो इस गान पे रो देते हैं की तुम खड़े हो सरहद पर तो हम बैठें हैं घरों मे

शायद आपलोगों को मेरी हिंदी ना समझ आती हो परंतु भावनाओं को समझने का प्रयत्न करें आप लोगों को मुझ जैसे कितने ही भारतीय पढ़ रहे हैं आप क्या परोस रहे हैं? सोचिए ।।.. निवेदन निवेदिता