शान

आन , बान , शान

आज नाज करें उन वीरों पर,

जो मान बड़ा कर आये हैं

दुश्मन को घुसकर के मारा,

शान बड़ा कर आये हैं।I

७ को घर में घुस कर मारा ,

७ को हूरों के पास पसारा ,

शान वतन की और बढ़ी ,

अरमान बड़ा कर आये हैं।।

एक शहीद तो सौ मारेंगे,

अब रीत बढ़ाकर आए हैं ,

हमें गौरव है उन वीरों पे ,

जो जान गवाँ कर आए हैं ।।

लहू का बदला सिर्फ लहू है,

लो लाशें यह बताकर आए हैं ,

ना जगह हो दफ़नाने की तो 

 क़ब्रिस्तान बढा कर आये हैं।।”निवेदिता”

P:S: सेना दिवस की बधाई 

12 thoughts on “शान

  1. बहुत ही सामाईक कविता. देश को अपनी सेना पर आप जितना ही नाज है

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