प्रेम

क्या कभी प्रेम किया है

प्रेम में दीवनापन क्या है ?

सोचिए और कहिए ,

क्या प्रेम पागलपन है ?

या प्रलोभन है ?

पागलों की तरह हैं;

आप सब देखना चाहते हैं

आप सब सुनना चाहते हैं

अपना प्यार जताना चाहते हैं

क्या प्रेम दीवनापन है ?

या आवारापन है ?

प्रेम की आवाज;

थका नहीं सकती हमें ,

आप आतुर हर पल

कुछ अपनी कुछ उसकी

कहने सुनने को

तुम्हारी प्रेम की गलती

एक शैली का कारण बनती है

यही प्यार कर सकता है;

यदिआप प्रेम में हैं,

तो आप जानते हैं;

यह प्यार करने के लिए अच्छा है,

और वास्तव में भी यही प्यार है.. निवेदित “निवेदिता “

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14 thoughts on “प्रेम

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