नन्ही बिटिया

नन्ही बिटिया ,

नन्ही तुझको मैंने पाया

मेरे गोद की चंचल छाया,

चाँद से प्यारा ,

अंखियों का तारा

दूर सुधूर ,

क्षितिज सा नज़ारा,

नज़रों में फैला उजियारा ,

नयन तारों सी टिमटिमाती,

नन्ही कोंपल प्रस्फुटित ,

घर -आँगन महकाती,

कूकती कोयल सी “कूहू”

भागे नन्ही हिरणी हो ज्यूँ ।

मेरी पलकों में छाया,

सूर्या की किरणों में समाया ,

स्वप्निल सपनो का सरमाया ,

उज्जवल स्वर्णिम काया ,

उस पत्थर मैं भी मैंने तुझको पाया ,

जिसे सबने “भगवान “ बनाया ।”निवेदिता”

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9 thoughts on “नन्ही बिटिया

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