शांति

जब तूफान के बादल ,

मेरे चारों ओर उबाल लेंगे,

और बिजली आकाश का

वीभाजन करेगी ,

जब हवा की चोंच ,

मुझ पर आक्रोशित होंगी ,

और जीवन का समुद्र ऊफान पर होगा ,

जब आशंकित दिल मेरा निरस्त होगा

मैं और मेरा मन आशंका से भरा होगा ,

कहीं से ठंडी हवा का झोंका आएगा

मझे आश्वस्त कराएगा , मुझे और

मेरे मन को , शांति और आराम देगा ।।

जब जीवन की आपाधापी में ,

उलझने होंगी ..

और मेरा विश्वास कम हो रहा होगा ,

और मेरा दिल दर्द से ,करहा रहा होगा ,

जब रात भयावह काली और अनंत होगी ,

तब मुझे एक चांदी की चमक मिलेगी,

चमकते चाँद की “ज्योत्सना “ यूँ प्रतीत होगी ,

ज्यूँ ,काले आकाश से परे, 

सब चीजें होंगी ,

धरती ऊपर को देखती अचम्भित होगी ,

मोहित उस कांति पे ,

मैं ही नहीं ,

धरा भी होगी .. “निवेदिता”

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24 thoughts on “शांति

      1. Precisely the problem dear, for I looked at the Google translation, Which means I did see the words and understood them hoping I would get a picture a semblance which I can assemble but alas this doesn’t always produce the artist’s intended result. So you see I had to do a little soul reading to try to fit your heart and soul.
        Sincerely; MAO (Angel)

        Liked by 1 person

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