एक कहानी लकड़ी की 

जन्म से मरण तक एक कहानी लकड़ी की,

जन्मते ही जो मिला वो पालना देखो लकड़ी का ,

सोने को जो पलंग मिला देखो वो भी लकड़ी का ,

खेल किलौने लकड़ी के ,

स्वस्तिक पूजन जिस दर पे होता ,

वो दरवाज़ा देखो लकड़ी का ,

यौवन के दहलीज़ पे आए,

तो फरों का बंधन बाँध दिया ,

जिस अग्नि के फेरे लिए

वो अग्नि ज्वलित लकड़ी से ,

हाय बुढ़ापा मार गया ,

चलना भी जब दूभर हुआ

तो एक सहारा लकड़ी का ,

अंतिम साँसे गिन रहा,

अब चिता बनेगी लकड़ी की ।जनम से लेकर मरण तक सुनो कहानी लकड़ी की ..  “निवेदिता”P.S. : Inspired by the bhajan “देख तमाशा लकड़ी का” 

19 thoughts on “एक कहानी लकड़ी की 

  1. bahut khub likha hai…..ye lakdi ka saath janm se maran tak hai….

    JITE LAKDI MARTE LAKDI,
    DEKH TAMASAA LAKDI KA,
    JANM LIYA PHIR MILA PAALNA,
    JHUL RAHE WAH LAKDI KAA,
    BRIDHAPAN MEN MILA SAHARAA,
    HAATH MEN DANDAA LAKDI KA,

    Liked by 1 person

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