पंछी 





पंछी, मैं तुम्हें प्यार करतीहूँ;

पंछी, मैं बनना चाहती हूं; 

पंख फैला उड़ना चाहती हूँ ;

पंछी, मैं बनना चाहती हूँ …



पंछी, मैं तुमसे सीखना चाहती हूँ ;

चाहती हूँ मज़बूत पंख फैलाऊँ ,

उन्मुक्त गगन में उड़ना चाहती हूँ 

पंछी मैं बनना चाहती हूँ …



पंछी, मैं तुमसी दूर दृष्टी चाहती हूँ ,

और लंबे समय तक चील की भाँति ,

उड़ती तलाशती नज़रें चाहती हूँ ,

पंछी मैं बनना चाहती हूँ …


पंछी , मैं मज़बूत पंख चाहती हूँ 

उच्च नील गगन में दूर सुधूर 

पार क्षितिज के जाना चाहती हूँ ,

पंछी मैं बनना चाहती हूँ .. “ निवेदिता “

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28 thoughts on “पंछी 

    1. हम पंछी उन्मुक्त गगन के .. हर उस इंसान का हक़ है जो उड़ना चाहता है .. पंख फैलाए नील गगन में :):) साभार धन्यवाद पढ़ने और सराहना के लिए ।

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