नूतन सूर्य

नूतन सूर्य

नूतन सूर्य के नव किरणों का करते प्रकट आभार,

नया वर्ष प्रारम्भ हुआ , हुआ पूराना साल ,

नयी सोच अथक प्रयास से ,जीवंत रखें संस्कार,

पाये वसुधा ,”सुख -समृद्धि और शांति” को पसार ( फैलाव)|

कीलक से कलम बनी ,कीलक की आभा खुशहाल;

कलकी के अवतार से कलियुग का मिटे विकार ,

सुधृढ देश सशक्त हो ,और भरे कनक कोष भंडार ,

धनधान्य से परिपूर्ण खुशहाल हो ” साधारण जन्संसार”।

‘निवेदिता’ का है निवेदन , मिले सद्बुद्धि का दान ,
संगी -साथी , बांधवजन पायें नई दिशा और ज्ञान,
ध्वजा धर्म ज्ञान की और देश भक्ति का आगाज़,
सद्भाव और सौम्यता का कराए नूतन एहसास ।

मिटे कजली पाप की ,हो अंत तिमिर अभिमान,
सृष्टी से विक्रम तक , हो भारत वर्ष का सम्मान ,
जय जवान जय किसान का विज्ञान से हो विस्तार ,
नयी दिशा के पूर्ण प्रकाश से हो चहूँ ओर उजियार |।

.. ” निवेदिता “

6 thoughts on “नूतन सूर्य

  1. मिटे कजली पाप की ,हो अंत तिमिर अभिमान,
    सृष्टी से विक्रम तक , हो भारत वर्ष का सम्मान ..बहुत ही बढ़िया लिखा है।

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