मैं कौन हूँ 

मैं कौन हूँ ? सब पूछ रहे थे प्रश्न ये मुझसे ,
सुनिए! जवाब हाज़िर लिए ही खड़ी हूँ ,
फूलों की महक मुझे मोहती है ,
खिलती हुई झुण्ड की ,गुमसुम कली हूँ ।

बच्चे हैं मेरे , पर बचपन गया नहीं है,
झरनों के रसातल में समुद्र ढूँढती हूँ,
स्वाति में ढूँढती सीप ओस की बूँद हूँ ,
सावन की फुहारों में मोरनी सी नाचती हूँ ।

मुश्किलों से डरना कभी सीखा नहीं है ,
अड़चनों के सागर को तैरकर पार करती हूँ ,
रोती नहीं बस मुस्कुरा कर बढ़ती रही हूँ 
रूकती नहीं मैं , बस चले जा रही हूँ ।।

ऐसा नहीं मेरा कोई नहीं हैं ,
हमसफ़र मेरे हमसाया बन खड़े हैं ,
प्रेम के दियों में लो प्रीत की जली है ,
बाहों में उन्हीं के दिवाली माना रही हूँ ।

जब प्रेम से वो मुझे देखते हैं  
उस प्रेम से मेरी नज़रें जगमगा रही हैं ,
स्वप्न मिलन का संजोये जा रही हूँ 
विरह की ज्वलन पे मरहम लगा रही हूँ ।।

मैं तो विकास की राह, प्रीत से चल पड़ी हूँ ,
न मैं राधा,न मीरा ,सत्यभामा ना रुक्मिणी हूँ ,
मेरे कृष्ण हैं वो ,और मैं उनकी “निवेदिता ”
प्रभू से निवेदन निवेदित किए जा रही हूँ … ” निवेदिता ”
फ़ोटो : गूगल 
                                                     

13 thoughts on “मैं कौन हूँ 

  1. प्रभुजी तुम चंदन हम पानी ।

    प्रभुजी तुम मोती हम धागा ।

    प्रभुजी तुम घनबन हम मोरा।

    प्रभुजी तुम दीपक हम बाती ।

    मै कौन हूँ । शायद रैदास ने बताया ।

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  2. waah …bahut khub..
    प्रेम के दियों में लो प्रीत की जली है ,
    बाहों में उन्हीं के दिवाली माना रही हूँ ।

    Liked by 1 person

    1. आभार अपका आपने समय निकलकर पढ़ा और मेरा प्रोत्साहन किया उसके लिए सादर धन्यवाद 🙏🙏 दीपावली अवम धनतेरस की सहर्ष शुभकामनायें

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