जीयो और जीने दो 

नन्ही मुस्कान को ज़रा पलने दो ,

मत तोड़ो उसे ,अभी खिलने दो ,

नयी कलियों को प्रस्फुटित होने दो ,

जो है सो है जैसा है उसे रहने दो
,

रज़ा उसकी मर्ज़ी में होने दो,


सुख दुःख के फेर शाश्वत है ,चलने दो ,

जो कहते हैं उन्हें कहने दो ,

सुनो सबकी, अपने मन की होने दो ,

बहते हुए भावों को ,अविरल बहने दो 

फल अच्छा या बुरा , मिलने दो 

ख़ुश रहो और ख़ुशी से रहने दो 

ज़्यादा नहीं तो बस “जियो और जीने दो “..  “निवेदिता “


P.S. : बेटियाँ  बाग़ में खिलती कलियों के समान हैं उन्हें प्रोत्साहित करो और आगे बढ़ने दो । बेटी को बचाओ और उन्हें पढ़ने दो ..  

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13 thoughts on “जीयो और जीने दो 

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