मिट्टी के गणेश 

अचरज में मन ही मन मुस्कुराकर ,

जो मूरत बन बैठा है मुझे बनाकर ,


मिट्टी के माधो, मिट्टी का चाकर, 


ख़ुश है मिट्टी का गणेश बनाकर ।” निवेदिता”
PS: प्लास्टर ओफ पेरिस के गणपति की स्थापना करने के बजाए माटी के गणपति स्थापित करें 🙏आप सभी को गणेश चतुर्थी की बधाई :):) 

गणपति बप्पा मोर्या , मंगल मूर्ति मोर्या “

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जनमष्टमी और स्वतंत्रता दिवस 

आज बहुत ही पावन दिन है जब पूरा देश स्वतंत्रता का पावन पर्व और जनमष्टमी का पावन त्योंहार एक साथ माना रहा है । देश की राजधानी दिल्ली में आज के दिन आसमान तिरंगों वाली पतंगो से लबालब डूबा रहता है और देशभक्ति सभी के जज़्बे मैं दिखती है । 

कुछ लमहें हमने भी उन्हीं में चुराए कुछ मस्ती और कुछ भक्ति में सराबोर । भगवान श्री कृष्ण के पराकट्योत्सव पर सुबह से ही मन में जोश था उसे और रंग दिया हमारे “प्रधानमंत्री जी श्री नरेन्द्र मोदीजी” की “न्यू इंडिया “की सोच और “सुदर्शनचक्र धारी मोहन और चरखेधारी मोहन ” के शब्दों की मिठास ने । 


” ना गोली से ना गाली से कश्मीर को शांतिमय बनाना है तो गले लगाओ ” शायद इनहीं शब्दों ने प्रौढ़ और युवा ही नहीं नन्हें बाल गोपालों का मन भी मोह लिया , मेरी बिटिया सुबह से ही मोदीजी के गुणगान करते नहीं थक रही थी की एक पतंग लूट कर उसके मुँह से अनायास ही सत्य निकला “मैंने मोदीजी लूट लिया ” कितना सत्य था ना कटुता ना छल , बस भोलापन पर भोलेपन में वो वह कह गई जो बिलकुल सत्य है।

हमारे प्रधानमंत्रिजी बच्चों के दिल में बसते हैं और मोदीजी के मन को लूटने वाले ये देश की आने वाली वो पीढ़ी है जो उनके न्यू इंडिया की सोच को साकार करेगी । 


जानती हूँ ना मोदीजी  इन शब्दों को सुन पाये ना ही इसे पढ़ पाएँगे उन्हें वक़्त नहीं होगा , परंतु “कुहु” जैसे कितने ही बच्चों के मन में छाप छोड़ने वाले ये उनके सूपर हीरो के लिए वे पथ प्रदर्शक हैं । अपने मन से कही बातों से उनके कोमल हृदय पर वे वो लिख रहे हैं , जो हम माता पिता होकर भी ना सिखा पाएँ शायद । 

“श्री कृष्ण ” के जन्म को अभी कुछ ही समय बाक़ी है सभी साथियों को इस पावन पर्व की बधाई ।हर घर झूले और दही हांडी है साथ ही आज हर कान्हा ने स्वतंत्रता का भगवा पहन रखा है , कुछ झलकियाँ आप सभी के साथ बाँट रही हूँ जो मैंने भी अपने छोटे से ठाकुर बाड़ी मैं सजाई है । मध्य रात्री का शृंगार तो अलौकिक होगा किंतु दिन का भी कुछ कम ना फबा मेरे लाला पे … 


आपकी “निवेदिता”..

बुराई

बुराई है, हाँ बुराई है

सब देखते बुराई हैं ,

खोजते बुराई हैं ,

लिप्त बुराई में ,

जब देखो तब ,

बस ढूँढते 

बुराई हैं |

बुरा है कौन ?

कहाँ बुराई है ?

क्यूँ जाने पर सब ,

कोसते बुराई है ।.. निवेदिता