ज़िंदगी बीत गयी 

ज्ञान की अज्ञानता में ,

ज़िंदगी बीत गई ,

ज्ञ और आन के बीच ज़िंदगी,

पहचान बनाने में बीत गयी ..

अस्तित्व की खोज में ,

ज़िंदगी बीत गयी ,

अस्ती और त्व  के बीच ज़िंदगी ,

अहम पहचानने में बीत गयी.. “निवेदिता ”

P.S. अर्थ : 

ज्ञ – ज्ञात 

आन – शान 

अस्ती – मेरा 

त्व – तुम्हारा 

अहम – मैं , और अहंकार 

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24 thoughts on “ज़िंदगी बीत गयी 

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