ज़िंदगी बीत गयी 

ज्ञान की अज्ञानता में ,

ज़िंदगी बीत गई ,

ज्ञ “और “आन ” के बीच  ज़िंदगी,
पहचान ,बनाने में बीत गयी ..


अस्तित्व की खोज में ,

ज़िंदगी बीत गयी ,

“अस्ती”  और “त्व ” के बीच  ज़िंदगी ,
अहं में  अहम को पहचानने में बीत गयी .. 

ज़िंदगी यूँ ही बीत गयी.. “निवेदिता


P.S. अर्थ : 

ज्ञ – ज्ञात 

आन – शान 

अस्ती – मेरा 

त्व – तुम्हारा 

अहम – मैं , और अहंकार 

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30 thoughts on “ज़िंदगी बीत गयी 

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