गाँव की वो डोली 

वो छतों की डोलियाँ जिन्हें फलंगते थे कभी पतंग लूटने को .. वो गलियाँ आज सूनी पड़ी हैं , बस बची हैं वो बारियाँ वो दरवाज़े , वो लोह लक्कड़ .. सब घरों में दुबकें हैं TV कम्प्यूटर , whatsap , खेल भी indoors खेलने वाले भी IN doors.. 

वो कटुक नीम की निम्बोरी , वो मंझों में उलझे तार , वो सयलिकों की घंटियाँ लगती आपस में होड़ , वो भगवाँ झंडा मंदिर की प्रभात फेरी , वो झाँझ की आवाज़ , वो कूकती कोयल और वो बोलते मोर , और सबके हम बीच फलाँगते डोलियाँ .. आज सब यादें हैं और हैं बस सन्नाटा .. 

ज़िंदगी बीत गयी 

ज्ञान की अज्ञानता में ,

ज़िंदगी बीत गई ,

ज्ञ और आन के बीच ज़िंदगी,

पहचान बनाने में बीत गयी ..

अस्तित्व की खोज में ,

ज़िंदगी बीत गयी ,

अस्ती और त्व  के बीच ज़िंदगी ,

अहम पहचानने में बीत गयी.. “निवेदिता ”

P.S. अर्थ : 

ज्ञ – ज्ञात 

आन – शान 

अस्ती – मेरा 

त्व – तुम्हारा 

अहम – मैं , और अहंकार 

कभी कभी हम निष्कर्ष पे सीधे पहुँच जाते हैं बिना ये सोचे कि अगले क्षण उसका परिणाम क्या होगा ? प्रेम , प्यार इन शब्दों  का दिन भर प्रयोग करते हैं लेकिन प्यार है क्या इसे हम नहीं समझ पाते  । ऐसा कहते हैं कि प्यार हवा में है ,अंग्रेज़ी में कहें तो लव इस इन एयर ” Love is in the air ” कहने का मतलब है की हवा में आजकल प्यार बह रहा है परंतु कोई यह समझने को तैय्यार नहीं की प्यार हवा में हमेशा से ही तैरता था तैरता है बस उस हवा को हम बहने नहीं देते । हम हर मर्ज़ की दवा किसी और को बना देते हैं चाहे वह उसकी क़द्र करे ना करे । सोचिए क्या कर रहे हैं ?? 

ज्ञान 

ज्ञान की परिभाषा क्या है ? क्या मात्र डिग्री होना या पढ़ा लिखा होना है ? क्यूँकि ज्ञान तो सभी के पास है , ज़िंदगी जीने जितना ज्ञान तो प्रभु ने पशु को भी दिया है । 

 किसी भी व्यक्ति के ज्ञानी होने की पहचान मात्र उसके ज्ञान उपार्जन से नहीं लगाया जा सकता , देखना यह चाहिए कि वह व्यक्ति अपने ज्ञान को जन हित में या समाज हित में किस प्रकार उपयोग में ला रहा है । 

ज्ञान और ज्ञानी को लेकर उठे मेरे मन की जिज्ञासा मेरे गुरुजी ने कुछ यही कहकर शांत की, परंतु अभी भी मेरे मन में जो शंका है वह यह कि जन हित और समाज हित का मापदंड क्या है ?

क्या किसी व्यक्ति मात्र के असंतुष्टि से हम यह अनुमान लगा लें कि सामने वाला व्यक्ति ज्ञान बाँटने में असफल है या हज़ारों की संतुष्टि उसकी सफलता है ? “निवेदिता”