कहानी

एक कहानी “निवेदिता” की ज़ुबानी ..

सुनलो, यह कहानी सूनलो,

कुछ मेरी कुछ तुम्हारी सूनलो,

मिलकर लिखी अब हमारी सूनलो,

कुछ खट्टी – कुछ मीठी 

कुछ कड़वे नीम की निम्बोरी सी, सूनलो 

सूनलो, यह अपनी कहानी सूनलो ।।
चंचल हवाओं सी, बरसती फुहारों सी, 

हँसती मुस्कुराती ठंडी बायरों सी ,

कुछ कही कुछ अनकही ,

कुछ विरह में बरसती बिरखा सी सूनलो 

लहरों में बहती कहानी , सूनलो 

सूनलो यह प्रीत भारी कहानी सूनलो ।।
पुखरी में पद्मसी, छांव भरे कदंब सी 

नख़रीली नार सी, सधृढ विचार सी, 

तेरी हँसती झलक बनती मेरा संसार सी,

कुछ नयी-कुछ पुरानी ,

कुछ परियों की इंद्रधानुशी कहानी सूनलो,

सूनलो, यह हमारी प्रेम कहानी सूनलो ।।
पल -पल चलती घड़ी की सुई सी ,

बाती की लो को जलाती रुई सी ,

सलौने कृष्ण पे सजती पीताम्बरी सी ,

कुछ बनती – कुछ सँवरती ,

कुछ इंतज़ार में बीतती कहानी ही सूनलो ,

सूनलो, ” निवेदिता” की ज़ुबानी सूनलो , 

यह प्रीत भारी कहानी सूनलो ।। “निवेदिता” 

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25 thoughts on “कहानी

  1. कुछ इंतज़ार में बीतती कहानी ही सूनलो ,——लाजवाब—–बहुतबकुछ कहते शब्दों की जुबानी सुन लो—–सुपर

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