हुंकार

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यह बात मेरे अरमानो की नहीं ,

यह बात मेरे अधिकार  है ,
निदान विकारों का हो और, 
तम पर विजय प्राप्ति हो ,
हो विकास हर पथ पर और 
मान तेरा चहुँ और बढ़े। … 
रहे सुरक्षित तूं,
और तेरी बेटी  यहाँ ,
गौ माता का सम्मान भी हो। 
हम हिंदुस्तानी हैं
हमें हिंदुत्व का भान रहे ,,
है गर्व और अभिमान मुझे 
तेरी बेटी होने का गौरव भी है। .. 
ऐसा विनय “प्रभु “से है 
संग अपने स्वाभिमान के ,
लाज तेरी रख पाएं हम,.  
सम्मान तेरा बढ़ाएं हम,.
मैत्री के धोखै में ,
ज़हरीली मिठाई खूब खिला चुके। …  
भान पाड़ोसी  अब तुमको हो
सहनशक्ति की हदें पार हुई ,
बंध करो ये नंगा नाच ,
नेत्र तीसरा जो खुल गया ,
तो तांडव हम दिखाएंगे। …. 
आतंकवादियों को आदर्श बनाने वालों ,
शर्म करो ,आस्तीन के सांपों तुम ,
ऋण जन्म भूमि का चूका नहीं पाओगे ,
बंध करो ये छुपकर वार ,
है हिम्मत तो सामने आओ।  
मुट्ठी भर गद्दारों से नहीं 
तुम हमें फुसला पाओगे। …  
कितने भी तुम अफ़ज़ल पैदा करो ,
हमसे भिड़ नहीं पाओगे ,
मुट्ठी भर गद्दारों पे हम सवा करोड़ भरी हैं ,
जिहाद के नाम पे जन्नत चाहने वालों ,
 तुमको जहन्नुम  दिखलायेंगे। …. 
कश्मीर के सपने भूल जाओ , 
एक इंच भी ले नहीं पाओगे ,
कारगिल को ही याद करो  ,
हमारी की सेना से भिड़ नहीं पाओगे।  … 
है नमन हमारे जवानों को , 
और सेना को बारम्बार बार  नमन , 
जब जब तुम सर उठाओगे ,
वीरों से  कुचले जाओगे।  .. 
 
आज स्वतंत्र हमारा भारत है ,
कश्मीर हमारा ताज है ,
जब जब आंच ताज पे हो ,
हर बार मुंह की खाओगे। …. 
माँ की सौगंध इस बेटी को ,
कोई निवेदन करूँ नहीं आज , 
है हुंकार गर्जना “निवेदिता” की ,
सुनलो दुश्मनों खोलके कान ,
हमसे गर टकराओगे तो चूर चूर हो जाओगे।  … 
 
आज बात नहीं कोई  मॉजह्ब की ,
बाँट हमें नहीं पाओगे ,
आज बात नहीं स्व रक्षा की ,
आज बात “माँ “के स्वाभिमान की है
अब क्रोध संभाल नहीं पाओगे । .”निवेदिता “
*Ishwar ke koti koti anshon ke roop mein Ma Bharti ke
bacchon mer bandhu bandhav janon ko 70 ve swatantra
diwas ki sadar shubhkamnayien  
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35 thoughts on “हुंकार

    1. Very true , I just can’t imagine how they would have been controlling their anger against those firangs .. But I feel pity on myself Because I can only express through poetries which is worthless ,unless I can do something in the real life for my watan ..

      Liked by 1 person

        1. Thank you for your generous words , obliged with your humility, No doubt my feelings are genuine but saying it can awake many is a exaggeration . I pray that all my wishes comes true some day and maa Bharti becomes happy again .. Fertile and prosperous again ..🙏

          Liked by 1 person

    1. Thank you , these words comes direct from heart . I am indebted to my Motherland and wish to live truely for it if can’t die” as preached by our PM Shri Narendra Modi in his speech from Lal quila ..

      Liked by 1 person

    1. Thanks Mani , I have just expressed what I am feeling though these words are very small to repay the debt of our Motherland , Yet whatever I feel i wrote and shared with you all , I am obliged by your support on my Blog. thanks once again for reading and visiting .:)

      Liked by 1 person

  1. ‘निवेदिता’ की कलम से निकली ये पंक्तियाँ, क्रांति की चिंगारी जलाने हेतु काफी हैं..
    बधाई हो दी..👏👏👌😊

    Liked by 2 people

    1. chutki yeh kranti toh humare jazbe mein hai jo rehti humehsa hai aur kuch na kar pane ki halat mein kuntha ka swaroop le leti hai , jise kalamse hi mitane ka kabhi kabhar prayas kar leti hun. :0 apppreciation ke liye sadar dhanyawaad .. aap jaisa toh nahin par jo likha hai wah mere dil ke bhaw hain .

      Liked by 1 person

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