टूट्ता तारा


आस्मां के दिल में बसा हुआ,

तारा जब टूट जाता है तो,

वो हताशा को नहीं पता,

पर हताश दूसरे तारों के

सीने में छुप जाता है..




आस्मां से गिरता वो ,

तारा जब टूट जाता है तो ,

उसे देख मन्नतों में ,

टूटे हुए दिलों को ,

फिरसे मिलन की आस देता है ..



ख़्वाहिशें जगाता  उन प्रेमियों के दिल में,

देखकर उसे मन ही मन ,

खोया प्यार माँगते हैं, 

नई इच्छाएँ , नए ख़्वाबों को ,

संजोने का वह ख़्वाब देता है ..



आशा की डोर अब वही बन जाता ,

अशुभ जो शुभांकर बन गया ,

टूटकर भी ना टूटा वो आज 

आस्माँ में नहीं ,विरह वेदनाओं में 

आज एक आस बन चमक जाता है। .. “निवेदिता”

#Photo courtsey: google 

21 thoughts on “टूट्ता तारा

  1. Thanks for stopping by my nlog that gives me an opportunity to visit your beautiful blog,this is fabulous piece of writing & motivates me to write beautiful in hindi 🙂

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