जन्माष्टमी


प्रभु श्री हरी के प्राकट्योत्सव पर सभी को राजस्थानी बोली में लिखी हुई मेरी पहली कोशिश की सादर भेंट , …


नँद घर आयो देवकी को जायो ।

वसुदेवजी पुगवान आया ,जमणाजी पगपखारे,

ब्रह्माजी पुष्प बरसावे, देव मुनिगण आरती गावे;

जाँकी छवि इसी न्यारी, बच ना सक्या ब्रह्मत्रिपुरारी

थे म्हारा अच्युतानंदन,वेंकटेश्वर ,कृष्णमुरारी 

ब्रज में ब्रिजबिहारी , वृंदावन में बनवारी ,

गोकुल में गोपाला , नंदगाँव में नंदलाला,

गोवर्धन में गिरवर्धारी ,घनश्याम सुदर्शनचक्रधारी ,

कंसमर्दन ,देवकीनंदन ,सच्चिदानंद छवि प्यारी ,

मोरमुकुट चंदन को टीको पीत वसन पीताम्बर धारी।

रास रचावे संग ब्रिजबाला ,नाचे संग गोपियाँ सारी,

लियो रूप गोपी को सुन्दर ,भोला शंकर बन्या नारी,

रास रचायो लीलाधर ऐसो ,सुध बुध खोए होया मतवारी 

पार्वतिजी हरखे- राधाजी निरखे, हर-हरी की जोड़ी प्यारी ।

मधुबन में नाचे,और नचावे,रूप सजायो ख़ूब बिहारी।

मन झूम्यो ,तन झूम्यो ,झूमे सारा जग संसारी 

नाचा गावाँ ,धूम मचावाँ ; आओ सब मिल मंगल गावाँ 

“निवेदिता” के मन में भी उत्साह है  भारी 

माखन मिश्री दधी बनाकर, जन्मोत्सव की करां तैय्यारी .. “निवेदिता”

Ps: Krishna janam ki dheron dher badhai aap sabhi ko .. 

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Shillong 

Adding another chapter to North East ,I bring you some more beautiful facts relating the culture and beauty 

“Meghalaya ” is also known as the Scotland of East. Mother Nature is at is best at Shillong, The Beauty is Scottish and the culture is British, the scenic beauty is mesmerising, and is blessed with the variety of Flora, Fauna and butterflies .
Orchids, which need utmost care and nurturing to grow at orchards , there in Shillong, it  grows itself in the jungles . There is infinite number varieties  of Piture  Plants. Moss and the rarest species of Water Lilies , Hydringea , Hibiscus are found everywhere and anywhere in the hills. Cherry Blossoms are topping on the cake.


People of Shillong are very disciplined and follows the custom of planting trees and plants at home. Each and every  House  is well decorated with plants .

From the time of British rule ,it is accustomed to having Wooden houses to avoid any natural calamities. The neatness, syncronisation and maintenance of the plants in each of the households is par excellence. A lesson could be learned from here that it is our duty to contribute towards the growth of greenery  around and pass it on to posterity. 

Mawlynong village in Meghalaya is the cleanest village in Asia. Among the rarest species found here are insect-eating pitcher plant, wild citrus, pgymy lily. The place also boosts of the maximum varieties of butterflies found in the world. The flora and fauna here creates eye soothing sceneries, no where else to be seen. 

While my visit  ,I had an opportunity to visit my friend, Mr. Suresh Singh ‘s house. I was so amazed to see my friend  Mrs. Poonam Singh’s love for nature. 

She has grown such varieties of flowers and Faunas , though they are not Khasi but has maintained all in the same way . The Wooden Bungalow with a Fireplace and a beautiful Lawn in the entrance . 


The similar experience was shared at Mrs. Wallangs house surrounded by hills around at Laban, Three Pines Colony . Entrance caught my eyes with beautiful Roses and many varieties of Lilium and orchids .

 The flowers grown in pots made of roots , was centre of attraction to me , I was amused to see those pots , they were beautifully cafted and was put infront of the window, the beauty was soothening my eyes . 


The house is very old, yet beautifully and well managed, though, alterations in the construction have been made to it but has a beautiful sitting room, and Visiting room all furnished traditionally with Cane furniture.

I feel lucky to meet the new friends ,and visiting the beautiful people and their beautiful houses .

My mom has the same craze for the plants , she has more than 500 🌿🌱plants at home and she always used to instruct us , “you may forget eating don’t forget to water the plants”when she was away from home .. 

Hope we all have this craziness and grow more plants more trees and try to save our environment .

P.S. : Grow trees 🌲🌲Save our Earth:)🌏

#Special thanks and regards 🙏to Mrs. Poonam Singh and Mrs. wallang . 🙂 “Nivedita”

रक्षाबंधन 


रक्षा का सूत्र भाई बाँध तुझे,

बंधन में बाँधा तुझको हमने,

प्रीत की रीत निभायी आज फिर ,

जब प्रीत का धागा हमने बांधा ।



नन्ही नन्ही तेरी कलाई ,

नन्ही सी में तेरी बहना ,

आज तुझसे क्या माँगू ?

मुझको बस तूँ प्यार करना ।


गर कोई मुश्किल पड़ जाए ,

याद तू मुझको कर लेना ,

आज तेरी में रक्षक हूँ,

तेरी अग्रज संरक्षक हूँ।


कल जब तूँ बड़ा हो जाए ,

मेरा ध्यान सदा ही रखना ,

कमज़ोर अगर मैं पड़ जाऊँ ,

मेरा मजबूत कंधा बनना ।


जैसे मामा , माँ और माँसी का रखता ,

भाई तूँ भी वैसा ही भाव रखना ,

हम दोनो बहनों का प्यारा,

भाई तूँ  खूब तरक्की करना ।


तुझको पाना सौभाग्य हमारा,

हमारा साथी सुख दुःख का बनना ,

तुझपे कभी ना कोई आँच आए ,

प्रभु से प्रार्थना तुझे हँसते मुस्कुराते रखना ।



माँ कहती है ,भाई का क्या छोटा 

भाई कहने से ही मुख भर जाए ,

मेरे जीवन रथ सारथी बन ,तूँ रक्षा करना ,

डगमगाऊँ तो हाथ थाम के चलना .. निवेदिता 

Independence Celebrations 

Today I am feeling a void, the reason being that I had such an awesome day yesterday.

The whole surrounding was filled with the high spirit of patriotism and related activities of enthusiasm.

The feeling was common in each of us. Everyone contributed and complemented the day in their own ways.

The dishes were extra delicious. All from food to clothes were into Tri colour .


Even our Temple and our Kanhaji was flying kites and hoisting Flag.


The kids and we all were full of pride looking at our National flag and singing National Anthem and Song , patriotism was madly in us and it is always there ,but due to hectic schedule and day to day workload, it somewhere somehow fathoms deep .


From one year old to 60 yr old, everyone was dressed in tricolours


participation of all at the terrace for kite flying brought about an adrenaline that ran in each one of us, even my nephew, 2-year-old, was holding the charkhi  for his kite “pang”(as he pronounced his Patang). [w

The youngest one is one-year-old and trying to copy us to fly the tricolour kite in her own style .

The shout of ‘Boh-Kaataaa…’ from our terrace and that of our neighbours ,was like renewing the bond of brotherhood and love. The calls of friends, relatives and smiles on the dear ones are what I like the most and wish the hangover to stay the way as it is……


In the middle of it ,none of us forgot to thank and pay our tribute to our Soldiers and our Army , Defence and even the Police who is always underestimated . They are the reason why we are so happily and safely celebrating the festival of Independence at our homes .

They are at borders , and there posts on duty to secure us from all the unforeseen dangers .

A Bow Salute to them and our PM Shri Narendra Modi to make us so confident that we are very strong to tackle any circumstances and challenges .

army

Jay Hind जय Hind की सेना …. Jay Bharat .. Vande Matram.. “Nivedita”

हुंकार

images

 

यह बात मेरे अरमानो की नहीं ,

यह बात मेरे अधिकार  है ,
निदान विकारों का हो और, 
तम पर विजय प्राप्ति हो ,
हो विकास हर पथ पर और 
मान तेरा चहुँ और बढ़े। … 
रहे सुरक्षित तूं,
और तेरी बेटी  यहाँ ,
गौ माता का सम्मान भी हो। 
हम हिंदुस्तानी हैं
हमें हिंदुत्व का भान रहे ,,
है गर्व और अभिमान मुझे 
तेरी बेटी होने का गौरव भी है। .. 
ऐसा विनय “प्रभु “से है 
संग अपने स्वाभिमान के ,
लाज तेरी रख पाएं हम,.  
सम्मान तेरा बढ़ाएं हम,.
मैत्री के धोखै में ,
ज़हरीली मिठाई खूब खिला चुके। …  
भान पाड़ोसी  अब तुमको हो
सहनशक्ति की हदें पार हुई ,
बंध करो ये नंगा नाच ,
नेत्र तीसरा जो खुल गया ,
तो तांडव हम दिखाएंगे। …. 
आतंकवादियों को आदर्श बनाने वालों ,
शर्म करो ,आस्तीन के सांपों तुम ,
ऋण जन्म भूमि का चूका नहीं पाओगे ,
बंध करो ये छुपकर वार ,
है हिम्मत तो सामने आओ।  
मुट्ठी भर गद्दारों से नहीं 
तुम हमें फुसला पाओगे। …  
कितने भी तुम अफ़ज़ल पैदा करो ,
हमसे भिड़ नहीं पाओगे ,
मुट्ठी भर गद्दारों पे हम सवा करोड़ भरी हैं ,
जिहाद के नाम पे जन्नत चाहने वालों ,
 तुमको जहन्नुम  दिखलायेंगे। …. 
कश्मीर के सपने भूल जाओ , 
एक इंच भी ले नहीं पाओगे ,
कारगिल को ही याद करो  ,
हमारी की सेना से भिड़ नहीं पाओगे।  … 
है नमन हमारे जवानों को , 
और सेना को बारम्बार बार  नमन , 
जब जब तुम सर उठाओगे ,
वीरों से  कुचले जाओगे।  .. 
 
आज स्वतंत्र हमारा भारत है ,
कश्मीर हमारा ताज है ,
जब जब आंच ताज पे हो ,
हर बार मुंह की खाओगे। …. 
माँ की सौगंध इस बेटी को ,
कोई निवेदन करूँ नहीं आज , 
है हुंकार गर्जना “निवेदिता” की ,
सुनलो दुश्मनों खोलके कान ,
हमसे गर टकराओगे तो चूर चूर हो जाओगे।  … 
 
आज बात नहीं कोई  मॉजह्ब की ,
बाँट हमें नहीं पाओगे ,
आज बात नहीं स्व रक्षा की ,
आज बात “माँ “के स्वाभिमान की है
अब क्रोध संभाल नहीं पाओगे । .”निवेदिता “
*Ishwar ke koti koti anshon ke roop mein Ma Bharti ke
bacchon mer bandhu bandhav janon ko 70 ve swatantra
diwas ki sadar shubhkamnayien  

टूट्ता तारा


आस्मां के दिल में बसा हुआ,

तारा जब टूट जाता है तो,

वो हताशा को नहीं पता,

पर हताश दूसरे तारों के

सीने में छुप जाता है..




आस्मां से गिरता वो ,

तारा जब टूट जाता है तो ,

उसे देख मन्नतों में ,

टूटे हुए दिलों को ,

फिरसे मिलन की आस देता है ..



ख़्वाहिशें जगाता  उन प्रेमियों के दिल में,

देखकर उसे मन ही मन ,

खोया प्यार माँगते हैं, 

नई इच्छाएँ , नए ख़्वाबों को ,

संजोने का वह ख़्वाब देता है ..



आशा की डोर अब वही बन जाता ,

अशुभ जो शुभांकर बन गया ,

टूटकर भी ना टूटा वो आज 

आस्माँ में नहीं ,विरह वेदनाओं में 

आज एक आस बन चमक जाता है। .. “निवेदिता”

#Photo courtsey: google 

शब्द मेरे


शब्दों की गहराइयाँ सागर की गहराइयों से गहरी..

शब्दों के नोक तीरों की नोक से ज़्यादा तीखे शब्दों की मिठास शहद से ज़्यादा मीठी ..

शब्दों की चंचलता किसी अल्हड़ गोरी से ज़्यादा चंचल..

शब्द वो जो अपनों से जोड़े  और किसीसे ना तोड़े..
शब्द वो जिसकी मीठी अनुगूँज हर घड़ी सुनायी दे ..
शब्द वो जो तेरी आवाज़ में मेरा लहजा सुनाई दे ..
शब्द वो जिसके आधार आप हों और रचना मेरी
शब्द वो जो आकर मेरे साकार तुझसे हों
शब्द वो जो तेरे सवालों का प्रत्युत्तर “प्रेम” से हो
शब्द वो जो मेरी विरह वेदन का दर्पण हो
शब्द वो जो “निवेदन”मेरा और “निवेदित” तुझसे हो
शब्द वो जिन्हें सुन तुम कहो “निवेदिता” तुम मेरी हो
शब्द वो जो पर ब्रह्म, हरी का ,हर” का, मेरी प्रार्थना स्वीकार करें
शब्द वो जो निवेदिता के निवेदन से
मेरे निकेतन में अनिकेत (शिव) का वास करें
शब्द वो जो मेरे हों और पूर्ण तेरी कविता को करें.. “निवेदिता”

हरियाली तीज 

झूले सावन के पड़े दूज चाँद का खिला

नहायी” ज्योत्सना “में  धरा,

अप्रतिम हरीतिमा का ,

कर सोलह शृंगार..

हरी चूड़ियाँ ,हरी लूघड़ि,

हाथों में मेहंदी रचाय ,

माथे पे बिंदिया सोहे ,

नयनों में कजरी ली लगाय..
हरियाली की गोद में मचल रही ,

रिझाने प्रभु को, धारा रूप सजाय,

बदरी बरसे सावन की ,

 अनुपम छँटा बिखराय..
पुष्प लताओं से लढझढ़,

नरम दूब की गादी बिछाय ,

पेड़ कद्म्ब का अति -आतुर ,

झूले डालों ने लिए हैं सजाय ..

साँझ हुई अविरल ,

चहुँ ओर गीतों का गुंजन ,

चल रही मीठी बयार ,मना रहे सब ,

हरियाली तीज का त्योहार..

उडीक प्रभु के आने की ,

धरा व्याकुल झलक पाने की ,

गोपियों के संग आयीं देखो ,

होकर राधाजी भी तैयार .. 

है निवेदन निवेदिता का ,

सुनलो सविनय सानुराग,

ज्यों राधा जू संग झूला  झूलो ,

झूलें निवेदिता संग भी एक बार .. “निवेदिता”