शब्द 

छोटी सी बगिया है हमारी जिसका नाम है “Bloggers Junction” जहाँ  एक से बढ़कर एक , हर तरह के “शब्दों “के खिलाड़ी मौजूद हैं , जो शब्दों से खेलकर नए नए फूल खिलाते हैं ,और हमारी बगिया को शोभायमान करते हैं । आज की संरचना सभी के शब्दों का निचोड़ है .. सभी ने अपने शब्द मेरी कविता के लिए दिए हैं .. मैं उन सभी की आभारी हूँ और गौरवान्वित हूँ की मेरे ब्लॉग पे यह कृति पेश की जा रही है .. 


P. S. : शब्द पे लिखी गई यह करती सभी की कविताओं का मिलन है । आशा है हमारा यह प्रयास  सभी को पसंद आएगा 


“शब्द”

ओ शब्द!

गरल न तुम हो जाना,

तोड़ न देना कोई

रिश्ता पुराना।


ओ शब्द !

रिश्तों में मिश्री
तुमसे ही हो,

प्रसन्नता का तुम

सबब बन जाना।


ओ शब्द!

पहचान मेरी

तुम ही बनो

और रचना की तुम

गरिमा बन जाना।.. आरती मानेकर 


ओ शब्द !
तुझे स्वप्न नगरी से बाहर 

“स्वप्निल “को जोड़ा 


ओ शब्द !

कहीं अग्नि की ज्वलन 

सागर से बुझाकर 

सौंदर्य की किरणों 

से ओजस्वी बनाया 


ओ शब्द !

 लेखनी से घिसकर

सुहागे से चमकाकर

शब्द तुझे स्वर्णिम बनाया .. स्वप्निल 


ओ शब्द !

मेरे शब्द अब मेरे नहीं 

जो कविता बन पाते,

वो जो “रमन” को कवि बना पाते ,

लिखने की कला भी नहीं  

मुझ अनपढ़ को शब्दों का खेल ,

समझ नहीं आया ।


ओ शब्द !

धन्यवाद उसे जो मेरी सोच को बदल कर 

मुझे अपना बना लिया 

मेरे शब्द उनके शब्दों से जोड़कर 

जीने का फलसफ़ा सिखा दिया.. रमनप्रीत 


ओ शब्द !
अब तो उनके शब्दों से 

अपने शब्दों से मिलाना ,

जहाँ शब्द मेरे और 

गीत उनके हों , ऐसा 

सुँदर संयोग बनाना ।


ओ शब्द !

वो शब्द जो मेरे आकार बने ,

दोनों के शब्दों का मिलन हो जाए 

जहाँ आप से वो तुम बन जाये 

और गीत, मेरे प्रीत के गाए .. निवेदिता 


ओ शब्द !
अब सोच मेरी ,शब्द उनके हों 

अहसास मेरे ,शब्द उनके हों 

उमंग मेरी शब्द उनके हों 

ख़ुशी मेरी ,शब्द उनके हों 

आस मेरी ,शब्द उनके हों 

उम्मीद मेरी ,शब्द उनके हों 

ऐसी लगन , कि बोलूँ तो मैं पर 

“शब्द ” सिर्फ़ उनके हों .. धीरज आनंद 


इन शब्दों के साथ एक नया शब्द आकार किया एक नई कोशिश को साकार किया … निवेदिता 🙏

सभी साथियों की कृतियों को आप यहाँ पढ़ सकते हैं :

http://ramandipreet.wordpress.com/

http://poemsbyarti.wordpress.com/

http://fairytaleofsimplegirl.wordpress.com/

http://extinct0703.wordpress.com/





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28 thoughts on “शब्द 

    1. आपका ज्ञान और दिशा निर्देश मुझे प्रोत्साहित करता है । यूँ ही आशीर्वाद देते rahein

      Liked by 1 person

    1. सीख आपलोगों से ही मिली है . वरना मेरी क्या बिसात , प्रेरणा का उद्गम व स्त्रोत आपलोग ही हो ।

      Liked by 1 person

    1. धन्यवाद निष्ठुर जी यह प्रयास है ” एक ” आपकी कविता में कहा ना सभा “one ” शब्दों के मोतियों को एक कविता में पिरोया गया है .. आभार आपका ।

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