गुड़िया 

मेरी नन्ही , चिड़िया सी सानी 

सितारों से उतरी परियों की रानी 


गालों में उसके गुलाबों की महक 

हँसे तो  जैसे घुंगरू की खनक 

आँसू उसके मोती के जैसे 

साँसो में मेरी बसी है वो ऐसे


आसमान में टिमटिमाता सितारा हो जैसे ।


लाल घाघरी जो सोहे है उसको

नन्ही सी देवी लगे है वो मुझको ।

भुआ कहके जो मुस्कुराती है मेरी मुनकी,

थकान मिट जाती है तन-मन की सारे दिन की। 

मेरी नन्ही सी गुड़िया सुनती है बातें,

उसकी यादों में गिन्ने लगी दिन रातें ।

फ़ोन से ही ख़ुशियों के तार जोड़ती है,

ऐँ ऐं कह के बुलाती चिल्ली मारती है ।

मेरी नन्ही सी परी अब घुटनों पे भागती है

पल्लू माँ का पकड़के खड़ी भी हो जाती है 
मुझे दादू और माँ के पास नहीं आने देती 


ज़बरदस्ती आऊँ तो धक्का मारती है ।


उसकी इनहीं अदाओं पे में वारी जाऊँ,

हरख हरख अठखेलियाँ मन ही मन इतराऊँ


निरख निरख हर्शाऊँ और बलिहारी तुझपे जाऊँ ..  “निवेदता”

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Womanhood

Woman is a feel, a celebration of life. She is beauty, honour and pride. She shines like a star.  She is the light in the dark. तुम शक्तियों का साधन हो, तुम स्त्रोत हो उद्गम का , खुशियों  का संसार …

Source: Womanhood

चाँद 

मुझे रंज है तुझसे ऐ चाँद , तू वहाँ तेरी ज्योत्सना को  अपनी आग़ोश में लिए बेठा है , 


यहाँ ज्योत्सना का चाँद ,कहीं काजल की स्याह में छुपा बैठा है , 


बादलों की झुर्मठ से झाँकता ,निकलता फिर छुप जाता , 


यूँ लुका छिप्पी खेलता दीख़ता है , बादलों के गोद में प्रेयसी के साथ खेलता है ,


मैं ना खेलूँ, तो भी उसे कहाँ फ़र्क़ पड़ता है , बस ऐसा कहकर दिल को ठंडक सा मिलता है ।        


 ” निवेदिता “

Soul Mate



I may need you or not, or shall I say

Leave me not, and never let me go away

Walk the path of life with me together

we shall find love, the perfect way

 To share the same fate and feel the same vibes ,

photo frame (c) Nivedita





To share the same thoughts and similar lines

To share the same memories of the lonely nights

To understand each other and resolve the small fights

random sketch (c) Nivedita


 

 


We are so far yet so near, so near yet so far, My dear

 I create my own fairy tale, You are mine, I know 

I am yours I know, but losing you is the only fear 

After meeting you I came to know, 

Who and what the ” Soulmates” are

….Nivedita

 


 

#photo # sketching

 

इंसान 




इंसान कतई बड़ा नहीं होता ,साल भर तक तो खड़ा नहीं होता,


निन्नयानब्बे के फेर में जकड़ा,

सौ का आंकड़ा कभी पार नहीं होता ।।


बंगला गाड़ी नौकर चाकर का  लालच 
सब संसाधन तो जूटाने में बस है हैरान होता 


चाहनाओं के स्वरों में प्रलोभनों का राग है रहता  

ऐसे में उसका गीत कभी पूरा नहीं होता ।।


एवेरेस्ट के ख्वाब संजोने वाला ,
रेत के टीले पे कभी खड़ा नहीं होता,


स्वयं को पूर्णता का चरम मानने वाला,
ज्ञान की अज्ञानता में है दिन रात सोता ,



डूबने के डर से तैरना तो दूर वह ,

जल के आस पास भी कभी खड़ा नहीं होता ।।  

निवेदिता” 

PS : #photos courtsey Riddhi Sharma and google …

किताब 

नए नए अल्फ़ाज़ों में 

उमंगें हैं नयी नयी ‘

नए नए से चेहरे हैं ‘

हर चेहरे की एक किताब नयी.……।  



मैंने उस किताब को चुनि   

जिसे पढने वाले पहले से हैं, 

बहुत से अल्फाजों में ,

गौण मेरी आवाज़ कहीं। ………….  



किताबें और बहुत हैं आलों (शेल्फ)में 

धूल जमी हैं पर्तोंपरत 

नईं पुस्तक रोज़ शामिल किऐ 

पुरानी किताबें वहीँ पड़ी। … 



पुराने शब्द धूमिल भये 

शब्द कोष में शब्द नहीं

मिटती स्याही लेखनी की , बस 

शब्दों की माला झूल रही …। 



हाथ फेरती पन्नों पे 

छुवन लकीरों की महसूस हुई 

आस कहीं अब भी बाकी है

उस किताब को पाने की … । 



मेरी पुस्तक अब भी वहीं 

बीत गए साल केयी 

यूँही मँझधार में झूल रही 

जो ख़त्म अभी तक हुई नहीं ..।



खुले पन्ने बिखर रहे हैं 

जिल्द पुरानी बची नहीं

उन पन्ने को पलटने से 

आने वाली मुस्कान नयी ……। “निवेदिता”

किताबें 


ज़िंदगी एक किताब है, मेरी  ज़िंदगी एक खुली किताब , जिसके पन्नों पे लिखी सभी नई पुरानी बातें और यादों में खुद को संजोये बैठी हूँ । 

कल एक पुरानी पुस्तक को हाथ में लिया , धूल की एक परत देखी – साफ़ करने लगी तो जिल्द का काग़ज़ पुराना होने के वजह से गल गया था और हाथ में आगया , सोचा इसे बदल दूँ । 


तभी ,खोलते हुए कुछ पन्नों पे नज़र पड़ी ,और उस पुरानी पुस्तक की महक मुझे मोह गई और अनायास ही मुझे अपनी यादों की गोद में बिठा लिया । 

आज भी वही सोच, मेरी दिमाग़ में बिल्ली की तरह तेज़ी से भागी, वो शाम जब में लाईब्रेरी से किताब लेके निकल रही थी , तभी दूर से किसी का पुकारना, सुनिए अगर आप बुरा ना माने तो क्या इसे मैं इस हफ़्ते ले सकता हूँ? मुस्कुराहट अपने आप होठों पे आगाई थी और सिर ने ख़ुश होकर हामी भी दे दी थी । 

यादों से वापिस लौटी ही थी की धूल अभी किताबों पर दीख पड़ी ।

फिर , दूसरी पुस्तक को साफ़ करने लगी तो अनायास ही खिलखिलाने लगी , आज भी याद है की किस तरह भागते भागते मैं प्रिन्सिपल मैडम से टकराकर सारी किताबें उनके ऊपर ही गिरा दी थी , और उनसे पनिश्मेंट भी मिली थी आज भी धूप में खड़े रहने का अहसास ज़हन में है । 


पर ,आगे नज़र पड़ी  उस छोटी सी स्लेट पर , एक जादुई दुनिया सी ,मेरे दिमाग़ में एक सोच बिजली की तरह कौंध गयी कि आज के परिवेश और जन संसाधनों के प्रगतिशील दौड़ में ,कहीं हम ऐसे कई पलों को खो तो नहीं रहे हैं ? क्या हमारी आने वाली पीढ़ियों को ऐसे पलों का अहसास होगा ? 

आप सोच रहे होंगे अचानक ही ये बात कहाँ से आइ ?

जी हाँ ! अचानक ही आयी ,परन्तु ठीक आयी , वो स्लेट जैसी वस्तु ज्ञान का भंडार लिए है । वह एक नन्ही सी दुनिया है , जो मेरी बिटिया की है । 

उसे वह “किंडल ” Kindle  बताती है । पूछने पे कहती है की हमारी पुस्तकों जैसी हज़ारों पुस्तक उस छोटी सी किंडल मैं आजाती है ,पॉकेट में डाल लो , ना जिल्द  चढ़ाने का झंझट ना सफ़ाई करने का , अजब है । हाथ की छूवन से पन्ने बदल जाते हैं । 

काग़ज़ की किताब से इसकी प्रति भी सस्ती है । कुछ ही दिनो पहले मैंने भी एक मित्र की पुस्तक  ख़रीदी “पर्सिवल” बाई  राजीव चोपड़ा । 


पर वह नई पुस्तक की महक नदारद थी । तभी से सोच रही हूँ की पुस्तकों का स्वरूप किंडल ने ले ली तो कैसा होगा पुस्तक जगत , लायब्रेरीयों में बस मक्खियाँ  होंगी और उन्हें म्यूज़ियम में बदल दिया जाएगा ,उनकी जगह बस ऑनलाइन स्टॉर्ज़  होंगी सब बिना भवों के जैसा , ना जगह रुकेंगी ना जिल्द फटेंगी ..?? 


क्या हमारी आने वाली पीढ़ी , नई और पुराने किताबों की सौंधी महक को नहीं सूंघ पाएँगे ? उन्हें जिल्द चढ़ाने के अहसास से अनभिज्ञ रहना होगा ? जैसे डिजिटल कैमरा आया और तस्वीरों का चलन बन्ध हो गया , कहीं काग़ज़ की पुस्तकें भी थी तो नहीं जो जाएँगी ?  

P S : यह मेरी अपनी एक सोच है ,जिससे अगर किसी को आपत्ति हो तो ख्श्मा प्रार्थी हूँ । मामूली ग़लतियों को कृपया अनदेखा करें ।और अपने विचारों से अवगत करवाइए ..  निवेदिता

Kids and me 

To Start with you , my little kuhu :*
My life line and my soul ,

I want you happy forever to be …

Then came kanhu , my lifeline 

I forgot all sorrows , felt so happy 

He kept me busy, just like a bee ..

Now it was you my angel ,my “Vidushi ”

Twinkle of my eyes and my smoothie 

Thank you  God for blessing them 

To me ..

A kid in me , and kid and me 
I am happy surrounded by them 
As many and whosoever , let it be

shyama , uddhav and vidur 
Kanhu and vidushi and Daiwik

my , nephews and my nieces ,my kids 

My evenings ends with them 

And 

thier morning starts with me .. 

With a child , & as a child in me 

I am happy to surround them

and they surrounded by me 

As many and who soever’s ,

let it be ..


Dear lil turtles or my lil duckies

Naughty little Sheru 

Or my lil kitty , or whosoever

Let it be .. 🙂 

Or my butterfly i call it  “wonder bee ”

My lil piegon my wonderful kids .. 

Kids are my life , and Lives a kid in me .. 

Motherhood 

Love is unfathomable .. It is deeper than the abyss .. True it is and when the love is between a child and a mother it is sacred and Divine to the bliss .. 

Mother’s love is indebted , few months ago, I shared a same bonding with a mother to be , A bond of trust , love and care .. She looked in my eyes like wanted to say please take care of them and see no one hurts, as I am going away to bring some twigs for my nest , to keep them warm, warmth of motherhood . We will be a family soon.

I too knodded my head and permitted her with love , 

She is ?

” Nivedita ” I named her and call her with the same ,and she responds back . As if ,she says yes! I am , I am you living another life, bringing your desires of motherhood in me .. 


You all must be wondering , what am I talking about and who is she? She,  is an Indian Piegon who layed two eggs in my gallery, with a bond of trust and safety with me, in me… 


With the warmth and love ,she hatched them, and  by  Gods grace 🙏! two little wonders breathed in our home in a few days .. 

She never left them alone any more , Mine and my daughter’s sole attention was to supply food and water to help her to survive in the peak of heat .

We were blessed with two little wonders whom I named “Ani “- “ket ”

Together I call them “Aniket”

They were so small and ugly too.. In the beginning , but to their mom? They were the most beautiful creation in the World ..  And yes for us too .. I was living my motherhood again everyday gazing at them how they look now? 


Kuhu (my daughter) never stayed inside ,even when it was                 47 degrees outside ,Sun was burning , but she was busy adjusting the sheets to cover them, from the crows and the heat.

My !My! They are growing beautiful day by day , and the mother all time sitting on them, giving them warmth. When I go to greet them the younger one pops its head out, in a reply saying  You missed me mom ! And greet back .. 


Days are passing its a month now.They are growing beautiful, 

Grace of God , here We fail to understand What is art ? What we paint or what he creates? They are wonderful.. Soothing my eyes with joy , and inner peace. 

A child is a child .. No matter whose it is .. 

Now they are transforming to grey – from yellow, my Ani -Ket are growing faster, in the shed of love care from all of us . Nivedita now leaves them for us, to have a glance of her kids. As if she says I am coming , look after them. 

They are now Big , next to grown ups ,running here and there , and hid themselves when hear us coming , mom is out to bring food for them to feed.

They are now ready for their flight , the first flight , knowing the World exploring New World , For them ,”Sky is the limit” . 

Ani ,today rode my back as he can fly now , Ket hugged me as he still need some time . 

I lived the moments of happiness with them surrounding me, filling me with joy .. 

The First flight…. I Wish them a beautiful World beyond my reach , I will see them in every other piegon , waiting for them to come again and hatch their eggs with thier foster mom … 🙂 

In a day or two they will be gone …nesting their Own world .. I am happy for them, and greatful to the mother for obliging us with this pleasure. Two months of journey comes to an end with the begining of their new journey … “Nivedita”

 #photos # emotions #love