सौम्य नवसंवत्सर २०७३

नूतन सूर्य के नव किरणों का करते प्रकट आभार,
“कीलक” का काल पूर्ण भया ,हुआ पूराना  साल ,
नवरात्रि के प्रारम्भ से  माँ दुर्गा की बरसे कृपा  अपार  , 
करें हर्ष उल्लास से  “सौम्य नाम ”  नवसंवत्सर  का सत्कार ,…  
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कीलक से कलम बनी कीलक की आभा खुशहाल;

“सौम्य” सौम्यता लाये, खुशहाल हो ” साधारण” जन्संसार  

नव वर्ष नव संवत्सर  के आने से मिटे माँ भारती का भार,

पाये वसुधा , “सुख -समृद्धि और शांति” को पसार ( फैलाव)||

‘निवेदिता’ का है निवेदन , है!प्रभु करो सद्बुद्धि का दान   
संगी -साथी , बांधवजन पायें नई दिशा और ज्ञान,

ध्वजा धर्म ज्ञान की और देश भक्ति का आगाज़,

नाम “सौम्य “नव वर्ष का,  सौम्यता का कराए नव एहसास ।

मिटे कजली पाप की ,हो  अंत  तिमिर अभिमान,

सृष्टी से विक्रम तक ,आरम्भ चैत्र को नव संवत्सर जान ||  ”  निवेदिता “
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21 thoughts on “सौम्य नवसंवत्सर २०७३

  1. Ati sundar, bhavo se pripuran kavya rchna….. atydheek sundar…. words kum hai mere paas iski sundrta ki tarif krne ke liye.

    natmastak ho naman apki kavita ko, congrats for such beautiful poem.

    thanks a lot for showing this poem 🙂

    Liked by 1 person

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