जागते सोते 

सोते सोते जाग गई ,

कहीं खोते खोते मिल गई ,

स्वप्न देखे जो बचपन में,

अर्ध योवन में जी गई ,

सोते सोते जाग गई ..



स्वप्न में तुझसे मिली ,

बंद आँखों में छिपी ,

तेरी तस्वीर कोरे काग़ज़ ,

पर उकेर गई ,

सोते सोते जाग गई ..



पता कहाँ था मालूम ,
नींदों में गलियाँ देखीं,

ढूँढते हुए तुझे,
कहीं तेरे दर पे आगई,

तभी सोते सोते जाग गई…


तूने भी झूठे स्वप्न दिखाए 

उन सपनों को सच मान गई

कड़वे बोल ज्यों ही तेरे 

मेरे कानों में पड़े 

सोते सोते फिर जाग गई.. “Nivedita”

चाहती हूँ 

जानती हूँ ,सब जानती हूँ,मन माने ,ना माने ,मैं सब मानती हूँ,

चाहना तेरी है ,तुझसे नहीं 

चाहत तुझसे ,किसी अनजान से नहीं 

तूँ चाहे, ना चाहे , तुझे चाहती हूँ….

  

 जानती हूँ ,यह भी जानती हूँ ,

तुझ तक पहुँचना मेरे बस में नहीं ,

स्वप्न ये मेरा , तुझे सरोकार नहीं

नयनों में काजल को रमाया , ज्योति नहीं ,

तूँ चाहे, ना चाहे , तुझे चाहती हूँ ….


  

जानती हूँ ,अब यह भी जानती हूँ ,

शरीर मात्र पाया ,आत्मा नहीं ,

लौ तो जलायी पर , दीया नहीं ,

तू रोष देख पाया ,मेरी याचना नहीं ,

तूँ चाहे, ना चाहे , तुझे चाहती हूँ…

  

जानती हूँ ,यह भी जानती हूँ ,

इबादत है तेरी , कोई काम नहीं 

है निवेदन ! “निवेदिता “का निष्काम ,

तू पत्थर ही सही , मेरा भगवान मानती हूँ,

तूँ चाहे, ना चाहे , तुझे चाहती हूँ….”निवेदिता”

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खुली पलकें 

Some loney nights, when we are exhausted , dream to sleep but coud’nt sleep. Eyes are tired ,body wants to rest . Mind but restless , no letting us sleep. Want to retire, feeling Tired, like a monkey in the rain and dead as Dodo , still no rest no peace ., 
Missing what? It is the real question , missing our loved ones living far far away . Seven oceans away , or Seven lives .. Answers are unquestionable 🙂 questions are unanswerable . I rest here ,letting the questions find their own answers… 

 with a small thought :
khuli palkon mein Raat palbhar mein guzar gayi ,khwabon ke galiyare se neend kahin ajnabi ho jaise.

खुली पलकों में रात पल भर में गुज़र गयी,

ख़्वाबों के गलियरे से नींद कहीं अजनबी हो जैसे .. “निवेदिता -Nivedita”

  
 

हे राम नहीं श्री राम कहो २

हे राम ! आपकी जय होवे  ..
है ,इतनी कहाँ बिसात मेरी ,
की हम आपको  जय करें ?

बस राम हमारा निकले नहीं ,

है निवेदन, ” निवेदिता “का 
बारम्बार स्वीकार करें,
दें हिम्मत हमको कहने की ,
हम 🙏हे राम! नहीं  .. श्री राम !कहें .. 

 
प्रभु के प्राकट्य के उत्सव पर ,

सब मिलकर जय घोष करें,

कर बद्ध विनती है ,उद्धार करें, 

सदबुद्धि- विश्वास का संचार करें,

लक्ष्य  की खोज में निकल सकें ,

बढते जाएँ कहीं रुकें नहीं ,

बस इतनी सी विनय सुने मेरी दें शक्ति हमें,

हम  संतुष्ट रहें और  ,

श्री !राम !! कहें , हे ! राम !! नहीं .. 

  
दुख में कदम डगमगाए नहीं ,

यश शक्ति मेरी अक्षय करें,

चाहना आपकी हो मुझे ,

चाहना चाहतों की आपसे हो नहीं ,

मिलकर सब जयघोष करें,
और इतना सा सब याद रखें,

दुख हो या तनाव कोई, हम ,

श्री !राम कहें , .. हे !! राम नहीं … ” nivedita “

सुररखि(Lady bird beetel )

ओढनी ओढ़े डूब की 
odhani
 

सुररखि (Lady bird beetel )लगी इतराय ,

सूखी रूंख दरख की ,
चादर झीनी होय जाये 
lady bird
 
 
रंग प्रेम बदरंग भयो 
 
रंगरेज़ ढूंढूं कित   पाये 
बद्री बरसे नेह की ,
जब पिया की पाती आये ..   @———” Nivedita “

Love ! Love !  

Sometimes I feel Like a maniac , in an asylum , running here and there, rolling in the roller coaster, days are so hectic and above all, monotonous.

Morning bells , and I get up , time for kids to go school than cook for lunch , rushing office , coming back and rush to kitchen . All day same ,Huh!! In the meanwhile I try and take out time to blog . ” I love reading more than writing  thats why I dont write regular ” so , as usual started reading the posts .

I read four posts today, one of them refreshed me to the core , that too at One at night,  forcing me to write this , felt like writing a poem but later thought just express in prose . As three out of four were  poems on love , and the best part all positive . Feeling so happy to see happiness and love around . Sitting beside , filling the gap , knowing the winters , cuddled in arms . All sound so gloomy ,and dreamy . Truth is Dream is my land where I live, live my soul the real me . A virtual World  better than life  , seemed like love is in air , everyone around me is in love . I am flying on the seventh cloud . 🙂 🙂 another seven .. Seven colours , seven sins , seven notes now seventh cloud  , oh it reminded of another seven came to know yesterday , any ways…

Coming back to the blogs and the Poetries.  Oh my! All talking about her , her smiles , hugs , cuddles , all the girls are lucky no doubt and so must be the boys to have them ofcourse,  Flowers of Love  blooming , in the gardens of life 🙂 and air filled with Love .. “Nivedita”

सात 

सात रंग इंद्रधानुश के (seven colours of rainbow)
सात स्वरों की सरगम है ( seven notes of music)
सात चक्र कुंडलिनी के (seven chakras in the body )
सात पापों का मेला है (Seven Sins)
Edit

सात बहने पूरब में (Seven sisters)
सात समंदर पार किए (Seven Oceans)
सात फेरों के बंधन में (seven Wow of marriage)

Edit
सात जन्मों का मेला है (seven cycles of

Life)

सात अजूबे सृष्टि के (seven wonders)
सात घोड़ों पे सूर्य सवार (seven Horses of Sun)

सप्त ऋषियों का तारा मंडल (Big bear constellation )
सप्त गिरी में सात ही द्वार ( Seven doors at Sapt giri temple)


सात ही दिनों का हफ़्ता है (seven days in a week )

सौम्य नवसंवत्सर २०७३

नूतन सूर्य के नव किरणों का करते प्रकट आभार,
“कीलक” का काल पूर्ण भया ,हुआ पूराना  साल ,
नवरात्रि के प्रारम्भ से  माँ दुर्गा की बरसे कृपा  अपार  , 
करें हर्ष उल्लास से  “सौम्य नाम ”  नवसंवत्सर  का सत्कार ,…  
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कीलक से कलम बनी कीलक की आभा खुशहाल;

“सौम्य” सौम्यता लाये, खुशहाल हो ” साधारण” जन्संसार  

नव वर्ष नव संवत्सर  के आने से मिटे माँ भारती का भार,

पाये वसुधा , “सुख -समृद्धि और शांति” को पसार ( फैलाव)||

‘निवेदिता’ का है निवेदन , है!प्रभु करो सद्बुद्धि का दान   
संगी -साथी , बांधवजन पायें नई दिशा और ज्ञान,

ध्वजा धर्म ज्ञान की और देश भक्ति का आगाज़,

नाम “सौम्य “नव वर्ष का,  सौम्यता का कराए नव एहसास ।

मिटे कजली पाप की ,हो  अंत  तिमिर अभिमान,

सृष्टी से विक्रम तक ,आरम्भ चैत्र को नव संवत्सर जान ||  ”  निवेदिता “