देवी 

मेरी आँखों में नहीं मेरे मन में बसी हे वह अच्छी है सावधान है 

वो महान है 

मैं उसके साथ से ही पढ़ सकता हूँ

वो शांत है ज्ञानवान है महान है

वो अपने कृत्यों को सम्भालती है 

वह देवी है भगवान है महान है

कुछ माँगती नहीं में अपने आप देता हूँ

वह धनवान है भाग्यवान है महान है

वह डराती नहीं में डरता हूँ 

प्यार जो इतना करता हूँ

सात सालों से है वह प्रधान है 

वह मेरी प्रियतमा बहुत महान है 

मेरी तो बस वो है

उसका घर मुझसे चलता है 

मैं लुटाता हूँ वो लेती है 

पर वह खुद्दार है उसका ईमान है 

मेरी जान हे वह महान है ।। … “निवेदिता” 🙂 🙂 

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