निर्झरप्रेम

ख़ामोश तुम ख़ामोश हम

झरनों की कल कल में सरगम 

तान स्वरों की मधुरिमा की 

निर्झर निर्मल प्रेम संगम । 
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बरसे मेघों की सुरमयी रिमझिम
गाये मल्हार कोकिल स्वर पंचम 
प्रथम प्रहर नव सूर्य की किरणे 
खेलें नन्ही अरुणिमा  संग । … 
मुंह खोले देखें इक टक
चाह स्वाति की चातक को हरदम
तारों की चुनरी में  चम चम
चादर झीनी रंगी रंगरेज़ के रंग। …   
 
नन्ही कोम्पल प्रस्फ़ुटित 
ली अंगड़ाई तरुणाई चंचल 
हो रहा इंद्रधुशीय रंगों का समागम  
प्रफुल्लित हृदय देख दृश्य मनोरम। .…  
निवेदिता
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10 thoughts on “निर्झरप्रेम

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