World  खोना-पाना 

We live in a World which seems so big to us , truth is it is very small .

We meet people we never thought of , and loose them when we never expect. 

 They are not lost,  just that we can’t see them because we are still at the same place and they moved on . So far so fast that visibility becomes poor and all  seems blurred .. 

हम थम गये , वो बढ़ते चले गए … मुड़्के देखने तक फ़ासला इतना बढ़ गया कि सब धूमिल हो गया..

And as said “Time is the best healer”  it heals every wound we start living with the pace of life and when we learn to live without them , they again knock our door and today we think Oh ! World is so small . Today they are here and we moved on .

तुम थक गये ,कारवाँ चलता गया … लौटने तक फ़ासला इस क़द्र बढ़ गया कि सब ओझल हो गया… “निवेदिता”

 

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मात-पितु

मुझे इस धरा पर लाये आप 

खड़े होना सिखाया आपने 

लड़खड़ाते हुए कदमो को

आज भी संभाला आपने। …

 

 
मेरी खामोशियों को समझा ,
उनसे  बातें की आपने ;
मैं खुशियों से खेलती रहूँ इसलिए, 
दुखों को दो हाथ लिया आपने। … 
विधाता ने भी मेरा साथ दिया ,
ढूंढते को ठिकाना दिया आपने; 
औरों की तरह न बन पायी कुछ ,
तो भी अतुल्य प्यार दिया आपने। …
खुश थोड़े में भी रहो न थको न हारो, 
ये सीख भी  सिखाया आपने ;
भावों में कमी नहीं मात पितु मेरे, 
विचारों में जीना भी सिखाया आपने। …
आज हम अपनी ज़िंदगियों में व्यस्त हैं 
भूल गए की इस लायक बनाया आपने 
नहीं शब्द न पूंजी की उऋण हो सकूँ 
मुझे पुत्री रूप में स्वीकारा आपने। … 
भूल कर कड़वे बोल जाती हूँ बड़ी हो गयी मान के 
नहीं भान कितने आंसू बहाये होंगे मेरी नन्ही खरोंच पे आपने    
भुला देना गलतियों को मेरी इस बार भी 
ज्यों विहफलताओं को हर बार भुलाया आपने। … 
है निवेदन “निवदिता ” का 
मुझे हर जन्म स्वीकार लेना 
थाम लेना हाथ मेरा ज्यों 
इस जीवन की ज्योत्स्ना बनाया आपने  ….”निवदिता ”

निर्झरप्रेम

ख़ामोश तुम ख़ामोश हम

झरनों की कल कल में सरगम 

तान स्वरों की मधुरिमा की 

निर्झर निर्मल प्रेम संगम । 
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बरसे मेघों की सुरमयी रिमझिम
गाये मल्हार कोकिल स्वर पंचम 
प्रथम प्रहर नव सूर्य की किरणे 
खेलें नन्ही अरुणिमा  संग । … 
मुंह खोले देखें इक टक
चाह स्वाति की चातक को हरदम
तारों की चुनरी में  चम चम
चादर झीनी रंगी रंगरेज़ के रंग। …   
 
नन्ही कोम्पल प्रस्फ़ुटित 
ली अंगड़ाई तरुणाई चंचल 
हो रहा इंद्रधुशीय रंगों का समागम  
प्रफुल्लित हृदय देख दृश्य मनोरम। .…  
निवेदिता

Battleship Of Love

In the age of Battles of Love ,

Confronting the Battleship.

Love makes the World go Round,

and keep thy Lover Abound………

To keep Loving the Lady of Hearts ,

With Deeper Love smiling profound .

He admires her smile and her tingling sound,

Her Eyes, her lips…..

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Oh My! He Blushes and and always Astound.

Pray to Lord Their Strong Love,

Keep Ringing Like the Bell

Fragrance of Happiness Surround the lovely Castle…. “Nivedita”

 

गलतियां

गलतियों का पुलिंदा हूँ मैं ,
जैसी भी हूँ उमदा हूँ मैं,
ख्वाबों पे ही जिन्दा हूँ मैं ,
तुझे नहीं मोल मेरा तो गलती तेरी,
हुज़ूर हज़ारों में चुनिंदा हूँ मैं..

हां गलतियों का पुलिंदा हूँ मैं,
रोते के सहारे का कन्धा हूँ मैं,
आज तेरे गले का फंदा हूँ मैं,
मैं वही हूँ जिसे कहते न थकते थे,
ऐ हसीन तेरे कानों का बूंदा हूँ मैं …

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माना गलतियों का पुलिंदा हूँ मैं,
मौला का रचा हुआ बन्दा हूँ मैं ,
अच्छा नहीं बहुत गन्दा हूँ  मैं,
गुनाह तेरा जो पर काट दिए मेरे,
नहीं तो उड़ता हुआ परिंदा हूँ मैं ।।… निवेदिता

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निवेदिता

मुझे मेरी कमज़ोरियों को उठाने की आदत थी,
उन्हें ही अपनी ताकत बनाने की नज़ाकत थी,
तभी कहीं से हँसते हुए तू आया मेरी देहलीज़
दिल में घर कर बन बेठा जाने कब दिल ऐ अज़ीज़…

सारे गमों और तकलीफों को दूर भगाने,
तू कुआँ बन आया मेरी प्यास बुझाने,
जाने कब मुझे “मानव” से “निवेदिता” बना दिया,
मेरी नन्ही सी हसरतों को सपना बना लिया,
तेरे अक्स को  मैंने अपना आइना मानने लगी,
भगवान से भी ऊपर कहीं तुझे बिठा दिया ।।…

मेरी ज़िन्दगी मेरी कोयल मेरी कुहू की सौं,
मैंने तुझे नहीं अपनाया अपने को तुझे सौंप दिया,
काजल का टीका लगाना भूल गयी थी शायद,
जो नज़र ज़माने की लगी और तुझे ज़ालिम बना दिया;….
फिर न मेरा दुःख नज़र आया न रोना
मुझे तेरे प्यार ने काफिर बना दिया ।।

कभी तुझे ललक थी मुझसे बात करने की,
खुले मुंह से मुस्कुराता मेरा गाल ललचाया,
अब उन गालोँ की चमक भी धुंधला गयी है,
मेरा बोलना तो चुभन का कारण बन गया,
शायद अब किस्मत ने आपना रंग दिखा दिया…||

तुझसे जो मिला उसे प्रेम समझा और जीने का कारण बना लिया,
अब लगने लगा मैं सुख का नहीं तेरी परेशानियों का सबब बन गयी हूँ,
आंसुओं के भँवर में मुझे तेरे गले का फंदा बना दिया||

जा रही हूँ गर मेरी ज़रूरत हो तो आवाज़ देना ….
कहीँ ,दूरसे डबडबायी आँखों से टकटकी लगाये तुझे ही देख रही हूँ ।।…”निवेदिता”

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निवेदन

न छंद है न अलंकार है ,
न खनक न झंकार है ,
बस भावों की परिकल्पना ,
लेखनी में किया साकार है,
बिना रंगों  के चित्रकार ,
न कवि न कलाकार
मात्र अहंकार है,
अर्पण तेरे चरणों में
किया विकार है ,
दे दान  मुझे ज्ञान का ,
तुझे श्रद्धासुमन स्वीकार हो
ज्ञान ज्योति प्रज्ज्वलित हो
दो शुभ संस्कार है ,
है निवेदन “निवेदिता” का
मेरे मन का तम मिटाकर
करो दूर अन्धकार है।।…”निवेदिता”

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हे शारदे माँ वीणा पुस्तक धारिणी विद्या दान करो मम्.. सरस्वती पूजा की सभी को बधाई..

ज़िंदगी

कुछ अनकही ख्वाहिशों का सिलसिला है ज़िंदगी ,

मंज़िलों से मुसलसल फासला है ज़िंदगी …..

कुछ तुझे पाने का कुछ खोने का नाम है ज़िंदगी ,
वस्ल ए  यार  का एहतेराम है ज़िन्दगी …..
कुछ बीते हुए लम्हों का हिसाब है ज़िंदगी ,
हँसते हँसते जीने का फलसफा है ज़िंदगी ….

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कुछ उफनते हुए लहरों का भाव है ज़िंदगी ,
सूनी इमारतों में गूँजती ग़म ए दास्तान है ज़िंदगी …
कुछ फटे हुए पन्नों की किताब है ज़िंदगी ,
फ़टी जिल्द से झलकती तेरी तस्वीर है ज़िंदगी …
 
कुछ तेरी कुछ मेरी कुछ हमारी है ज़िंदगी ,

इश्क़ के रंगों में सराबोर खुशनसीब है ज़िंदगी। … “निवेदिता ”

#Life without you is difficult but moments spent with you were the moments I lived my Life . Though , I we are not along today  my love but I am sure you must be missing me as  I do .  I cherish the memoirs which brings the feel of sacrement and eternity.
Sometimes we loose something  to find something precious I wish you find the one very precious and remember me only in happiness . My #Life Without You is like Body without soul and heart . I love you and will always keep loving …<3<3

हम हो न हो ये गुलशन रहेगा

A Tribute to the students killed at Pakistan . The barbaric act couldn’t stop me from sharing it with all

“हम हो न हो ये गुलशन रहेगा “।…..

पाठ ऐसा शिस्क्षकों ने पढ़ाया ही था

अंतिम लेख किसी  मासूम ने लिखा था,

पांच साल का हुआ था न जाने को जी चाहता था

माँ ने भेजा था उसको ,कहाँ जी मानता था

फिर भी यहि सोचके दिल को तसल्ली  दी थी

स्कूल को गया है नहीं जंग  कहीं है लड़ने

वहीँ कहीं यही सोच लेके के नन्हा खुश हो रहा  था ,

या फिर किसी बिल्डिंग का करूँगा नव निर्माण।

टीचर बनुगा ,पायलट बनूँगा या पिता की तरह जवान ,

सरहद पे लड़ मिटूंगा  बनुगा पाकिस्तान की शान ,

था उन मासूमों का  मुसल्लम ईमान।।

किसे मालूम वह शब्द आखिरी  शब्द होंगे

जो बच गये  वह ज़नाज़ों के मेलों में शामिल होंगे

दूध सरकार ने पिलाया उन सांपों को करने खुद का कल्याण

आज आस्तीन पे लौटें हैं वही बनके हैवान।।

उन मासूमों को कतल करने वालों क्या पाया है तुमने

हे खुदा के घर जाना ज़रा तो तहफीक करते।।

रूह कांपती है घिनौना  मंज़र को देखके,

आंसू नहीं थमते रोये हम फफक फफक के,

उन माओं के उजड़े हुए घरोंदे देख के मन यूँ रो रहे ह

जिन्हे हो  तुम दुश्मन समझते रोनें को तुम्हे वही कंधे दे रहे हैं

अब तो सम्भालो और जागो  न वह तालिबानी

न कोई  धर्म जानते हैं नहीं कोई इमांन न धर्म मानते हैं

जो कोई इंसान ऐसा हो तो उसे हम हैवान मानते हैं

जल्लाद मानते हैं , शैतान मानते हैं

उन्हें इंसान मानना ही गुनाह मानते हैं  । …’निवेदिता’

तलाश

ज़िन्दगी एक तलाश ,क्या मिलोगे कभी ?
मिल गए तो वो ख्वाब ,क्या अपनाओगे भी?
पा लिया अब उसे ,मेरी ख़ुशी का अंदाज़ा नहीं,
ज़िन्दगी, फिर एक डर कहीं खो न दें कभी …,
सहज असहजता है ज़िन्दगी का सबब
न मिले तो पाने का, मिले तो खोने का डर
,
स्वप्न निवेदिता के , ये निवेदन है प्रभो!!
जो बुनेे हैं जतन से स्वप्न उन्हें कभी खो न दूँ
सुबह तुमसे और बस तुम्ही से हो हर रात मेरी
तुझे खोने और पाने के बीच ज़िन्दगी वो भंवर
जहाँ हक़ निवेदन से माँगा और और किया तेरी नज़र
निवेदिता की ज़िन्दगी चल पड़ी तुम्हारी डगर।।       … निवेदिता

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