व्यस्त हूँ

कितना अच्छा होता , मैं भी कठोर होती

गर पूछते वो क्या हुआ चुप क्यों हो ?
कहती व्यस्त हूँ ,हाँ  ठीक हूँ , क्यों ?
परवाह के जवाब में सवाल दाग पाती ….
ज़िंदगी से कुछ पल अपने लिए उधार लेती ,
गर पूछते क्या हुआ नाराज़ क्यों हो ?
मौन रहती कुछ न कहती और रूठ जाती ,
न मानती रूठती और रूठी ही रहती। ..
वे  मनाते तो न मानने का ढोंग करती
फिर कुछ पलों में मान जाती
मुस्कुराती और उनकी  बाँहों  में कूद पड़ती। …
गर वो पूछते की क्या हुआ उदास क्यों हो ?
पर काश वो कभी समझते और रूठने पे कभी तो मनाते। …. निवेदिता
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Far Far Away

What do I want
Nothing out of the way
Just a little care when I am away
Far far away …

How do I feel
Just what a fish out of water
A teardropp in a loud laughter
Love in a heart of a hater..
When you  are away
Far far away …

How am I lost ?
Like my Soul in yours
Like a rain drop in the ocean
A pinch of Sugar in my Tea
Nectar in Honey
Foot prints on the Bay
A Loner whole night busiest in the day
When We are Far away far Far away …

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आशाएं

जीवन में कुछ पाने की

अभिलाषाए जब जग जायें

तभी तोह जीवन को जीने की

आशाएं नज़र आयें

 

निराशा के चंगुल से छूट

भाग्य दुल्हन बन बैठी हें

सारी खुशियाँ दामन में

किस्मत दीपों सी जगमगायें

 

कब जीवन अंत हो जाये

इसका हमें है ज्ञान नहीं

बस लोगों के कहने की

परवाह हम कर बैठें हैं

 

सुन्दरता का घमंड हमें है

ना जाने कब मिट जाएंगें

मिटटी से बने हुए है

मिटटी में मिल जाएंगें   … “निवेदिता”

है नमन!

CYMERA_20160104_172241है नमन! उन वीरों को जो अपनी जान पे खेल गए,
भिड़ते हुए उन बुजदिलों से ,लड़ते लड़ते शहीद हुए|

है नमन! उन शेरनियों को जिनके दूध की शक्ति से ,
दुश्मन मुंह की खाने को आखिर में मजबूर हुए |

है नमन! उस पिता की छाती को जो अपने दिल के टुकड़े को ,
भारत माता की रक्षा को शेरों से पूत न्यौछावर किये ।

है नमन! उन वीरांगनाओं को जिनकी मेहँदी भी अभी सूखी नहीं,
इंतज़ार था पिय के आने की  जहां विदा किया उन्हें रोते हुए।

चूड़े का रंग छूटा भी न था रंग लाल चुनर के फीके हुए,
विदा किया तोपों की सलामी से वीरों को  तिरंगे में लिपटाऐ हुए।।

है नमन! उन सपूतों को जो पिता की कमी को भरते हुए,
सेना में भर्ती को हैं तैयार फिर गोली खाने को छाती पे।।

हम अपने घरों में सो रहे वो जान की बाजी लगा गए,
उन लोगों के घर उजड़ गए हमारे घरों को बचाते हुए।।

हर मात पिता के आँखों का सपना है ,पूत तुम जैसे जने ,
है नमन ! मेरा ,स्वीकार करो ,अर्पण अश्रुसुमन तुम्हें
स्वीकार करो बारम्बार करो ।।… “निवेदिता”

नव ज्योत्स्ना

CYMERA_20160101_152617नव बीज बीजन नवकोम्पला

नव युगल प्रेम नव योजना

नव निर्वाण सृजन नव वंदना
नव देह धूमिल नव आत्मना
नव स्नेह कुसुमित नव कल्पना
नव सूर्य उदय नव अरुणिमा
नव दीप दर्शन नव प्रज्ज्वला
नव प्रेम प्रफुल्लित नव प्रेरणा
नव हर्ष उल्लास नव अभिनन्दना
नव चन्द्र कला नव ज्योत्स्ना
नव पवन वेग नव मेघना
नव सृत प्रवाह नव निर्जला
नव निर्मल सरिता नव तरंगिना
नव अर्थ सिंधु नव जीवन
नव कूक कोमल नव कोकिला
नव कर्म प्रकाश नव प्रोत्स्ना
नव वर्ष मंगल हो है यह कामना। . ” निवेदिता “

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