ख्वाब

मेरे उन आंसुओं का कोई मोल तुझे इसलिए नहीं क्योंकि बोली मेरे आँखों की ही मालिक ने लगाई नहीं , ख्वाब झूठे दिखाए ख़ुशी कभी दिखाई ही नहीं…

ख्वाबों में जागना मेरी फितरत हो चली , तूँ उस अधूरे ख्वाब की उलझन है जिसे सुलझाना मेरी अड़चन हो चली ।।

हर रात सुबह तुझसे बात करूँगा कहकर सोना हर सुबह उन बातों से पलटना तेरी फितरत हो चली , फिर भी उन झूठे वादों की तामीर का इंतज़ार करना हद हो चली ,
और दिन रात बस तड़पते हुए रोना मेरी फितरत हो चली ।। ..

जानती हूँ पढ़कर भी अनदेखा करना तेरी फितरत है और उस बेदर्दी बेफिक्री का इत्मिनान से इंतज़ार करना मेरी फितरत हो चली ,.. निवेदिता

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Old and New

IMG-20151224-WA0058Nothing is new neither me nor you
Same old hills , same old planes
The slopes of the unending lanes
The moist drizzles drowning my heart
The saddening wind putting souls apart
The dreams turning into nightmares
The love filled heart today who cares
The coffee round the corner cart
Turned into tea pot as my daily part
The cukoo on the bamboo plants
Forgot to speak and say just can’t
Whistling the tunes of cries and pain
Left wid me is bleeding heart and stains
You are bzee with your nears and dears
Rest of time for your special friends..
I am no where and now heading away ..
Tried lot many times to hold u back
To keep the realtionship alive
But you have excuses for every dive
You are a bee busy in the Hive ..
Nothing changed except you..
And your love and care too ..
Nothing is new neither me nor you
And my love is and will be always for you… “Nivedita”

हे राम!नहीं श्री राम कहो

राम लला को हम हरदम याद करते हैं या कहे प्रभू को पर दुखी स्वर में क्यों। गर हरदम करें तो शायद दू:ख हो ही न । बस इतना सा प्रयास और निवेदन .

IMG_20151230_170229399हे राम!नहीं श्री राम कहो,
हे , !दुःख करुणा का सूचक है,
जो याद प्रभू को करना तो,
दुःख में ही क्यूं याद करें,
नाम राम का हर पल लो, 
पर सुख में भी सुमिरन करो,
श्री , लक्षमी की का द्यूतक है
हर पल राम के चरणों में नमन🙏
नाम लेने से अगर सुख मिले,
तो हे !राम ,नहीं श्री !राम कहो,
क्योंकि श्री !,  हे!का पूरक है…. “Nivedita”

so far yet so near

Too much on my mind

lost what I am trying to find

I never,in any Life

would be able to show how I feel

want to say so much to you

we stay so far yet so near

only, if you could hear

wish u understand the worth

and not just read this

if so happen, we reach the bliss

my cries and pain rolling down my tears

your warm hugs and you my teddy bear

you my food my only need

you are the one my heart plead

love me live me but never ever leave me ….. “Nivedita”

 

Horns of mysteries

1

White flower blooming in the yard ,

smelling all over was vanilla and clove

devil in my heart started playing games ,

hoping the happiness on the cards
dreaming the notes of inviolate love
my Mind and my Soul aching above…
horns of Mysteries pierced by morning thistle
blue was the sky and my frowning glory
down the lane cool breeze blowing the whistle
drowning in your thoughts and building the castle
with little pain and in vain my fanatic love story.. “Nivedita”

अजीब है

अजीबियत का दौर चल पड़ा शायद … अजीब है !!

जो हो रहा है सब अजीब ,जो पाया है क्या सच में पाया है ? न पाया तो अजीब है , । साल गुज़र गया और जहां साल भर पहले समय बहुत था , व्यस्ततम में “व्यस्त” नहीं , आज सब के लिए समय है पर मेरे लिए ” व्यस्त” !!! कितना अजीब है , !! । जब माँगा नहीं तब मिलजाना कितना अजीब था आज चाहे तो भी न मिलना कितना अजीब है । कभी Santa कभी Pucchu कभी नोनू , कभी छुटकू, क्या पाया , क्या खोया जाने कितना अजीब है,।। इंतज़ार दिन रात का मात्र एक मुकुराहट का कितना अजीब है , मेरी चाहतों का बांध सब्र ने रोक रखा है , यह भी अजीब है । मुझे तेरा इंतज़ार है तुझे मेरा नहीं , हैना!! कितना अजीब है । ये साल भी निकल रहा है पिछले साल की तरह, तब तेरे आने की दस्तक की ख़ुशी से अजीब था आज कितना निष्ठुर ओह !! अजीब है साल दर साल हर साल अजीब है , मेरी बातों मैं जहां कल तक ऱस था आज कितना नीरस अजीब है , कल जितना अजीब था आज उससे भी अजीब है बस नया साल आने को है वो कितना अजीब होगा यह सोचना ही अजीब है ।। अब यह सोचना की क्या कभी समझ आयगा? क्या व्यवहार बदल पायेगा ? यह भी अजीब है ।। …… “निवेदिता”

नशा

कहने को तो इन आँखों ने पानी से बेइन्तिहान प्यार किया

प्यार में इसकदर मशगूल कि अपनी नस्ल ही पानीदार बनालिआ
पर परखा जब प्यार को जाना कि पीतल को सोना बनादिया,
पानी पर मरने वाली आँखों ने ही झट पलकें झपकाई
और छलका कर आंसुओं को गिरा दिया  ……..

Inspirational-Quotes-Life-Changing

उन आंसुओने  पलकों से बहते हुए कहा …

“नशा तेरा जो चढ़ा खूमारी कभी ना उतर पायेगी

जीने की आरज़ू  रहे न रहे आरज़ू तेरी कभी ना मर पायेगी” ……….. “Nivedita”

तुम और मैं

‘पास बैठे और बस बैठे हि रहे तूँ
चंचल सी पलकें मचलती रहे यूँ
हिरणी सी तेरी चाल निहारूँ
तू उठे तो संग तेरे उठूँ मैं
चले तो संग तेरे चलूं मैं
बातें जो तेरी पुतलियाँ कहें
नज़रों को समझने की कोशिश करूँ मैं
मेरी नज़रों से जो देखे तो जाने
कैसे तेरी हर हरकत में विद्युत् भरुं मैं
तुझे सुनूं और सुनता ही रहूँ में
तेरी खामोशियों पे भी हामी भरूँ मैं
तेरे केशों में उंगलियां मेरी चले यूँ
उलझनों को यूँ ही सुलझता रहूँ मैं
लबों पे तेरी सिलवटों को समझूँ
सभी उदासियों को दूर करूँ मैं
समीप मेरे जो जरा तूं बेठे
बाँहों में पकड़ झट बाँहों में भर लूँ मैं।। “निवेदिता”

पिता

तुम जगी हो अगर उसे सुलाते हुए रात भर,
जगा हूँ मैं भी बत्तियां बुझाने को मगर.
चोट उसे लगी, दर्द मुझे हुआ तुम रोई हो अगर
भागा तो मैं भी हूँ उसे दावा लगाने को मगर.
तुमने सीने से चिपका कर दूध पिलाया,

टहला तो मैं भी हूँ छाती से लगाये ,

जब लगी आने उसे हिचकियाँ रात भर ..
अंगुली थाम कर चलना सिखाया है तुमने अगर,
तो संभाले  है उसके डगमगाते कदम मैंने भी मगर
कल ब्याह का सपना संजोने जो लगी तू है अगर
उज्जवल भविष्य को उसके सँवारा है मैंने भी मगर
कल गुड्डे गुड्डियों का खेल खेलती थी, 

आज हमारी गुडिया चली हमें छोड़ कर

विदा तूने जो किया सिसकियाँ भर के अगर 
तो नम पलकों से डोली में बिठा रोया तो मैं भी बहुत फफक – फफक कर

बन्ध कमरे में मगर……..

कमजोर  है तूँ , कठोर हूँ मैं अगर

11 हूँ, पत्थर तो नही, बंध कमरा ही मिला है रोने को मगर।। … “निवेदिता”